Generated by All in One SEO v4.9.8, this is an llms.txt file, used by LLMs to index the site. # संभाषण एक वार्तालाप ## Sitemaps - [XML Sitemap](https://test.lifescience-forum.com/sitemap.xml): Contains all public & indexable URLs for this website. ## Posts - [Vedic Concept of Law and Jurisprudence](https://test.lifescience-forum.com/vedic-concept-of-law-and-jurisprudence/) - Jurisprudence (धर्मशास्र) is philosophy behind how human beings interact with each other, how they should deal within a society, in a nation and in a world as whole. | Vedic Concept of Law and Jurisprudence - [मायां तु प्रकृतिं](https://test.lifescience-forum.com/maya-tu/) - इतिहास की दृष्टि से पहले सृष्टि, फिर स्थिति, फिर संहार होता है। साधना में संहार, पालन और उत्पादन यह क्रम मान्य होता है। | मायां तु प्रकृतिं - [भगवद् अवतार का प्रयोजन](https://test.lifescience-forum.com/bhagwad-awatar/) - | स वा इदं विश्वममोघलील (श्रीमद्भागवत), भगवान की लीला अमोघ है, वे लीला से ही इस संसार का सृजन, पालन और संहार करते हैं किन्तु इसमें आसक्त नहीं होते। चक्रपाणि भगवान की शक्ति और पराक्रम अनन्त है, उनकी कोई थाह नहीं पा सकता। भगवद् अवतार का प्रयोजन - [प्रणव, गायत्री आदि में स्त्रियों का अधिकार](https://test.lifescience-forum.com/gayatri-mantra-stri-adhikar/) - स्त्रियों को मंत्र से पूर्व भी ॐकार का जप नहीं करना चाहिए, श्री लगाया जाता है। भगवान शंकर ने पार्वतीजी को उपदेश करते हुए कहा है कि ॐकार सहित मंत्र स्त्रियों के लिए विष के समान है। | प्रणव, गायत्री आदि में स्त्रियों का अधिकार - [भगवान शिव का शरभावतार](https://test.lifescience-forum.com/sharabha/) - अत्यन्त आर्त भाव से प्रार्थना किए जाने पर देवाधिदेव महादेव ने उन देवताओं को अभयदान दिया और आश्वस्त किया कि ‘मैं उनका संहार करूँगा’। | भगवान शिव का शरभावतार - [न वै मृत्य:](https://test.lifescience-forum.com/na-vai-mriyah/) - न वै मृत्य:, मृत्यु है ही नहीं। मृत्यु व्याघ्र के समान प्राणियों का भक्षण नहीं करती है, इसका कोई रूप नहीं देखा जाता है, अतः मृत्यु तो है ही नहीं। | न वै मृत्य: - [महान सृष्टि](https://test.lifescience-forum.com/mahan-shrishti/) - वह कौन सा वन था? अथवा वह कौन सा वृक्ष था? जिससे ये स्वर्ग और पृथ्वी छाँट कर अलग किए गए। हे मनीषी विद्वद्गण! अपने मन से मनन करके पूछिए की कौन इन चौदह भुवनों को धारण करता हुआ अध्यक्ष बनकर बैठा है? | महान सृष्टि - [श्रीमच्चक्रावतार सहस्त्रबाहु कार्तवीर्य अर्जुन](https://test.lifescience-forum.com/kartveerya-arjuna/) - कार्तवीर्य उसी यदुवंश में थे जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। विष्णु पुराण में कहा गया है - “जिस वंश में श्रीकृष्ण नामक निराकार परब्रह्म ने अवतार लिया था, उस यदुवंश का श्रवण करने मात्र से मनुष्य सम्पूर्ण पापों से मुक्त हो जाता है।“ | श्रीमच्चक्रावतार सहस्त्रबाहु कार्तवीर्य अर्जुन - [पिण्डदान मीमांसा (श्रीयोगवासिष्ठ के अनुसार)](https://test.lifescience-forum.com/pinddaan-mimansa/) - जिस मृतक का पिण्डदान नहीं हुआ है वह सूक्ष्म शरीर के निर्माण होने तक आकाश में भटकता ही रहता है, वह क्रमशः तीन दिन जल में, तीन दिन अग्नि में, तीन दिन आकाश में और एक दिन अपने घर में निवास करता है। | पिण्डदान मीमांसा (श्रीयोगवासिष्ठ के अनुसार) - [विघ्नहर्ता श्री गणपति](https://test.lifescience-forum.com/shri-ganesh/) - श्री गणपति आदि देव, सर्वजगत के पति अर्थात् पालन करने वाले हैं। अनन्तकोटि ब्रह्माण्डनायक, परात्पर, पूर्णतम, परब्रह्म, परमात्मा ही ‘गणनाथ’ एवं ‘विनायक’ कहे गए हैं। | विघ्नहर्ता श्री गणपति - [शंकरात्मा मारुति: कपिसत्तम: (हनुमानजी)](https://test.lifescience-forum.com/shankaratma/) - “पार्वती वा त्वया तुल्या वर्तते नैव भिद्यते” अर्थात पार्वती तुम्हारी ही सदृश हैं (तुम्हारे समान मेरा कोई प्रिय नहीं है), परंतु वह (हनुमान जी) तो मुझसे सर्वथा अभिन्न है। | शंकरात्मा मारुति: कपिसत्तम: (हनुमानजी) - [रुद्राणां शङ्करश्चास्मि](https://test.lifescience-forum.com/rudra/) - आप स्वयं शिव हैं। आपकी बायीं जाँघ पर शक्तिस्वरूपा देवी, दाहिनी जाँघ पर गणपति, आपके नेत्र में सूर्य तथा हृदय में भक्तराज भगवान् श्रीहरि विराजमान हैं। अन्न के ब्रह्मरूप होने तथा आपके उसका भोक्ता होने के कारण हे ईशान! आपके श्रेष्ठत्व में किसे सन्देह हो सकता है। | रुद्राणां शङ्करश्चास्मि - [षड्दर्शन तथा वेदान्त के उपदर्शन](https://test.lifescience-forum.com/darshan-2/) - सभी दर्शनों में मुख्य अंतर यह है कि ये जीव, जगत और ब्रह्म के संबंध को विभिन्न दृष्टिकोणों से समझाते हैं और प्रत्येक का विशिष्ट माध्यम और दर्शन है। | - [मृत्यु से मुलाकात](https://test.lifescience-forum.com/meeting-death/) - रोज घर से सूचना मिलती कि फलां रिश्तेदार पत्नी सहित आज मर गये, आज के दिन में रिश्तेदारी से चार लोग कम हुये हैं। न्यूज चैनल का खैर क्या कहना, वह तो श्मशान की रूहानी कहानी बता - बता कर कार्यक्रम जारी रखे हैं, कोई मरे गिद्ध को तो लाश से मतलब है। | मृत्यु से मुलाकात - [होली–रसराज महोत्सव](https://test.lifescience-forum.com/holi-mahotsav/) - ब्राह्मणों द्वारा सभी दुष्टों और सभी रोगों को शान्त करने वाला वसोर्धारा-होम इस दिन किया जाता है, इसलिये इसको होलिका भी कहा जाता है। | - [वसुधैवकुटुम्बकम्](https://test.lifescience-forum.com/vasudhaiva-kutumbakam/) - मनुष्यों के प्रति "वसुधैवकुटुम्बकम्" का समयानुकूल भाव यह है कि यह संसार हमारा कुटुम्ब तो है किन्तु उनके प्रति हमारा व्यवहार उनकी पात्रता के अनुसार होना चाहिए। | वसुधैवकुटुम्बकम् - [भौम वैकुंठ वृन्दावन](https://test.lifescience-forum.com/vrinda/) - ‘त’ का अर्थ 'मरण' है। इसमें ‘उकार’ अर्थात योग लगा है जो मरणयोग्य अर्थात मृत है। ल+सी=लसी का अर्थ है ‘कान्ति’ अर्थात जो मृत होकर भी कान्तिपूर्ण है, वह ‘तुलसी’ है। | भौम वैकुंठ वृन्दावन - [राम-राम](https://test.lifescience-forum.com/ram-ram/) - अयोध्या में अनुमान लगाया जा रहा है कि प्रति वर्ष 75 करोड़ श्रद्धालु देश-विदेश से पहुँचेंगे। लगभग 50 हजार करोड़ का व्यापार होगा और इससे लगभग 10 लाख लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। | राम-राम - [नास्तिकों को चुनौती](https://test.lifescience-forum.com/atheists/) - धर्म से कैसे कोई विमुख हो सकता है? कोई न कोई धर्म न मानते हुए भी आप मानते हैं। अब जबकि आप धर्म विमुख हैं फिर सनातन हिंदु धर्म पर टिप्पणी कैसे कर सकते हैं? - [जय जय रघुवर](https://test.lifescience-forum.com/jay-jay-raghuvar/) - कहा गया है कि बुद्धिमान कवियों को इसी प्रकार विविध भाषाओं में प्रबंधों (काव्य) की रचना करनी चाहिए, ऐसे मंत्रों की रचना में कोई दोष नहीं होता अपितु ऐसा करने से भगवान प्रसन्न होते हैं। | जय जय रघुवर - [राम कहें या श्री राम?](https://test.lifescience-forum.com/ram-shriram/) - "बाढे पूत पिताके धरमे" पिता के धर्म से पुत्र विकास करता है, पिता की संपत्ति और पुण्य पुत्र को भी मिलते हैं। तब क्या उस पिता के पाप का भागीदार पुत्र को नहीं बनना पड़ेगा? मुस्लिम आक्रांताओं के पाप कर्म का फल उनकी संतानों को भारत में भुगतना पड़ेगा। | राम कहें या श्री राम? - [सरजू सरि कलि कलुष नसावनि](https://test.lifescience-forum.com/sarayu-river/) - ‘शर’ के द्वारा लायी जाने से लोग उसको ‘शरयू’ नदी कहने लगे। अथवा सरोवर से निकलकर आने के कारण उसका ‘सरयू’ नाम पड़ा, कुछ लोगों का ऐसा कथन है (नदी पुनीत सुमानस नंदिनि)। | सरजू सरि कलि कलुष नसावनि - [आदित्याद्वेदा जायन्ते](https://test.lifescience-forum.com/ved-from-aditya/) - सूर्य भगवान ने कहा- “द्विजश्रेष्ठ! तुम सम्पूर्ण शतपथ ब्राह्मण का भी प्रणयन (सम्पादन) करोगे, इसके बाद तुम्हारी बुद्धि मोक्ष में स्थिर होगी”। | आदित्याद्वेदा जायन्ते - [रावण की लंका कहाँ थी?](https://test.lifescience-forum.com/lanka/) - यदि आप आधुनिक श्रीलंका को ही प्राचीन लंका मानते हैं तो आपको जान कर आश्चर्य हो सकता है कि सिंहलद्वीप सन् १९७२ ईस्वी तक ‘सीलोन’ नाम से जानी जाती थी जिसका नामकरण करके सन् १९७२ ईस्वी में ‘श्रीलंका’ किया गया है। अतः यह भी नहीं कहा जा सकता कि ‘श्रीलंका’ नाम प्राचीन ही है। | रावण की लंका कहाँ थी? - [स्वप्न मीमांसा](https://test.lifescience-forum.com/swapn-mimansa/) - बृहदारण्यकोपनिषद् ३.४.९ में आया है कि स्वप्नलोक लोक और परलोक के बीच का सन्ध्यस्थान है (संध्यं तृतीयँ स्वप्नस्थानं)। इसके भाष्य में भगवान शंकराचार्य लिखते हैं कि धर्म के फलस्वरूप परलोक में होने वाले सुख दुखों के दर्शन होते हैं। - [धर्म और राजनीति](https://test.lifescience-forum.com/dharm-and-politics/) - चारों शंकराचार्य धार्मिक विधियों के पोषक हैं, न कि मसखरे। आपकी आदत है कि बिना जाने, समझे प्रोपोगेंडा को ही अपना विचार बना लेते हैं। चार पीठ चार वेद के परिचायक हैं। जिनका जीवन धर्म के संरक्षण के लिए है, आप उनकी आलोचना कर रहे हैं। | धर्म और राजनीति - [श्रीराम जन्मभूमि मंदिर उद्घाटन](https://test.lifescience-forum.com/shri-ram-janmabhoomi-temple-inauguration/) - राजनीति तो होती रहेगी, लोग भला-बुरा कुछ तो कहते रहेंगे, इन सबके बीच राम लला के भक्त इसी से प्रसन्न हैं कि ५०० वर्षों के संघर्ष के उपरांत अंततः अब राम मन्दिर का उद्घाटन होने जा रहा है। कुछ लोग तो असंतुष्ट ही रहेंगे, सबको संतुष्ट करना भी जीवित मेढकों को तौलने वाली बात है। | - [रामायणमादिकाव्यं स्वर्गमोक्षप्रदायकम्](https://test.lifescience-forum.com/valmikiya-ramayan/) - कवि कालिदास, शार्ङग्धर, महाकवि भास, आचार्य शंकर, आचार्य रामानुज, राजा भोज, से लेकर गोस्वामी तुलसीदास तक सभी ने ‘आदिकवि कवीन्द्र वाल्मीकि जी’ के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की है। और इसलिए वाल्मीकिरामायण पर अगणित टीकाएं हैं। | रामायणमादिकाव्यं स्वर्गमोक्षप्रदायकम् - [विवाह संस्कार](https://test.lifescience-forum.com/vivah-sanskar/) - सनातन धर्म में मनुष्य का मूल उद्देश्य पुरुषार्थ चतुष्टय (धर्म, अर्थ, काम के माध्यम से मोक्ष) की प्राप्ति है। दोषों के परिमार्जन को ‘संस्कार’ कहा गया है। दोषों को दूर करके धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष - इन चारों पुरुषार्थ के योग्य बनाना ही ‘संस्कार’ करने का उद्देश्य है। | विवाह संस्कार - [दीपावली, दीपाली अथवा दीवाली (भाग-२)](https://test.lifescience-forum.com/deepawali-part-2/) - प्रदोषसमये लक्ष्मीं पूजनयित्त्वा यथाक्रमम्, के अनुसार रजनीमुखात्मक प्रदोषकाल में ही लक्ष्मीजी का ‘कमला स्वरूप’ विद्यमान रहता है, अतः यही समय सही है। रात्रि अथवा मध्यरात्रि में ज्योतिर्मयी पद्मासना कमला माता का सर्वथा अभाव रहता है। | - [दीपावली, दीपाली अथवा दीवाली (भाग-१)](https://test.lifescience-forum.com/deepawali-part-1/) - वास्तव में शब्द है – दीपाली। निर्वचनार्थ है – दीपों की आली (आलि) अर्थात श्रेणी अथवा पंक्ति। जिस पर्व में दीपों की पक्तियाँ प्रज्ज्वलित रहती हैं, वह ‘दीपाली’ कहलाया। इसी को दीपावली अथवा दीवाली नाम से भी कहा गया। | दीपावली, दीपाली अथवा दीवाली (भाग-१) - [बाँस : (वंशस्तु भगवान् रुद्रः)](https://test.lifescience-forum.com/bamboo/) - विवाह, उपनयन आदि संस्कारों में मण्डप के स्तम्भ बांस के ही बनाए जाते हैं। यहाँ बांस को ‘स्तम्भ’ कहा गया है। यथा पारस्कर गृह्यसूत्र में आया है “स्तम्भैश्चतुर्भिः सुश्लक्ष्णां वामभागे तु सद्मनः”। | बांस : (वंशस्तु भगवान् रुद्रः) - [वेद - ज्योतिर्मयी वाणी](https://test.lifescience-forum.com/veda-jyotirmayi-vani/) - विचारों का रथ वाणी है तथा 'वाङ्गमय' वाणी का बना हुआ वह विशाल महल है जिसमें सम्पूर्ण चिंतन भाषा का आकार धारण करके स्थिर स्थान पाता है। आज से हज़ारों वर्ष पूर्व निरुक्तकार यास्क ने इस प्रकार के अनूठे महल के बहुमूल्य खजाने को 'शेवधि' बताया था तथा इसकी हर मूल्य पर सुरक्षा के प्रयत्न करने को कहा था। | वेद - ज्योतिर्मयी वाणी - [अष्टादश पुराण और उप-पुराण](https://test.lifescience-forum.com/18-puran/) - जिस प्रकार एक ही व्याकरण विषय में प्रवक्ता आदि के भेद होने पर ग्रंथों की बहुलता से व्याकरण की आठ संख्या का विघात नहीं होता इसी प्रकार एक - एक पुराण में कर्ता अवान्तर विषय आदि भेद होने से पुराणों की अठारह (अष्टादश) संख्या का विरोध नहीं होता। | अष्टादश पुराण और उप-पुराण - [नवरात्र - नवदुर्गा पूजन](https://test.lifescience-forum.com/navaratri/) - पूरे वर्ष में नवरात्रि चार बार मनाई जाती है। चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ मास में प्रतिपदा से लेकर नवमी तक; किन्तु गृहस्थ लोगों के लिए चैत्र नवरात्र (वासन्ती नवरात्र) और दूसरा आश्विन मास की शारदीय नवरात्र - यह दो ही होती हैं। | नवरात्र - नवदुर्गा पूजन - [श्रद्धे श्रद्धापयेह न:!](https://test.lifescience-forum.com/pitra-4/) - श्राद्ध मध्याह्न के बाद आठवें मुहूर्त में और अमावस्या में ही क्यों किया जाता है? श्राद्ध में दिया गया हव्य कव्य पदार्थ पितरों को पितृलोक में कैसे मिलता है? जो पितर अन्य योनियों को प्राप्त हो गए उन्हें श्राद्ध अन्न कैसे मिलता है? गया तीर्थ का क्या महत्त्व है? | श्रद्धे श्रद्धापयेह न:! - [श्रद्धाविश्वमिदं जगत्](https://test.lifescience-forum.com/pitra-2/) - प्रकृति के नियम के अनुसार जो अन्न हम खाते हैं, वह रूपांतरित हो जाता है और कुछ समय बाद शरीर में क्षीणता आ जाती है, अर्थात पुनः भोजन की आवश्यकता पड़ती है। किन्तु मृतात्मा जो लोकान्तर में जा रहे हैं, उनके वाहिक शरीर में प्रकृति-नियमानुसार जो क्षीणता आती है, उसकी पूर्ति करने की शक्ति उनमें नहीं होती है। इसलिए श्राद्ध करने की आवश्यकता होती है। | श्रद्धाविश्वमिदं जगत् - [नमो व: पितरो!](https://test.lifescience-forum.com/pitra/) - ब्राह्मणों के पितर ‘सोमपा’ ऋषि भृगु के पुत्र हैं, क्षत्रियों के पितर ‘हविर्भुज’ ऋषि अंगिरा के पुत्र हैं, वैश्यों के पितर ‘आज्यप’ ऋषि पुलस्त्य के पुत्र हैं, शूद्रों के पितर ‘सुकाली’ ऋषि वसिष्ठ के पुत्र हैं। | नमो व: पितरो! - [प्रेतबाधा](https://test.lifescience-forum.com/pitra-3/) - प्रेतग्रस्त प्राणी बड़े ही अद्भुत स्वप्न देखता है (प्रेत दर्शन, भाषण, चेष्टा व पीड़ा), और जब भी धार्मिक कृत्य करने की प्रवृत्ति होती है तब प्रेतबाधा उपस्थित होती है एवं उन पुण्य कार्यों को नष्ट करने के लिए चित्त-भंग कर देती है। | - [सनातन](https://test.lifescience-forum.com/vegi/) - जल में तैरती मछली या आकाश में उड़ती चिड़िया या घास चरती बकरी को देख आप के मुंह में पानी आता है, जठराग्नि जाग्रत होती है? तब आप को आध्यात्मिक चिकित्सा की आवश्यकता है। जिससे ‘मनुर्भव’ - मनुष्य बन सकेंगे। | सनातन - [मानवीय चेतना](https://test.lifescience-forum.com/human-consciousness/) - भारतीय ज्ञान विधा, भारतीय दर्शन मनुष्य के चेतना के विस्तार पर जोर देते हैं। मनुष्यता के विकास से शांति संभव है, नहीं तो विश्व भर में मार काट मची है। एक देश दूसरे देश को पड़ोस में नहीं देखना चाहता है। | मानवीय चेतना - [उत्तिष्ठत मा स्वप्त अग्निमिच्छध्वं भारताः](https://test.lifescience-forum.com/bharat/) - यह देश अन्न और धन से अपने देश के तथा दूसरे देश के लोगों की उदर पूर्ति करता है, भरण पोषण करता है। भरण पोषण करने के कारण और ऐसा स्वभाव होने के कारण यह देश भारत नाम से प्रसिद्ध है। | उत्तिष्ठत मा स्वप्त अग्निमिच्छध्वं भारताः - [सनातन हिन्दू धर्म](https://test.lifescience-forum.com/sanatan-hindu-dharma/) - परिवारवादी, कुनबावादी और भ्रष्टाचारी परेशान हैं। सत्ता बिना हिंदुओं को तोड़े नहीं मिल सकती है और इसी कारण जातिवाद पर सियार रुदन फिर जातीय जनगणना के हिमायती बनना आदि इत्यादि। - [वैदिक पर्व 'रक्षाबंधन'](https://test.lifescience-forum.com/vedic-rakshabandhan/) - प्राचीन काल में रक्षा पोटलिका बनाई जाती थी, कपास अथवा रेशम के वस्त्र में अक्षत, गौर सर्षप (सफेद सरसों) सुवर्ण, सरसों, दूर्वा, चंदन आदि पदार्थ रखे जाते थे। - [विश्व गुरु भारत](https://test.lifescience-forum.com/vishwa-guru/) - १ से लेकर ९ तक की संख्या का दहाई अंक क्या होगा, यह शून्य के स्वतंत्र होने पर निर्भर हुआ। संख्या का स्थान ब्रह्मगुप्त ने छठी सदी में ही बताया था। यह शून्य का विचार भारतीय दर्शन में पूर्व से ही रहा है। | विश्व गुरु भारत - [शिवशक्ति](https://test.lifescience-forum.com/shivshakti/) - भारतीय समाज का पार्टीगत आधार पर विभाजित होना बहुत शोचनीय विषय है। इतिहास को सेक्युलर बनाना हो या लुटेरों को निरपेक्ष शासक के रूप में प्रस्तुत करना, यह सभी भारतीय मन को मानसिक गुलामी में जकड़ कर सत्ता को यथावत बनाये रखने का प्रयास रहा है। | शिवशक्ति - [मनुज को रौंदता विकास](https://test.lifescience-forum.com/human-in-development/) - पूरी दुनिया आपको अमानुष बनाने पर लगी है। हिंसा और हिंसक विचार पूरी तरह से समाज पर हावी है। आप आंख बंद कर ध्यान करें, देखें क्या विचार आया? कुछ आया भी या IPL देखने की जल्दी है? हमारे पास अपने लिए समय नहीं है, पता नहीं कब अपने आप से बात की थी, याद नहीं आ रहा है। | मनुज को रौंदता विकास - [नाग-पञ्चमी](https://test.lifescience-forum.com/naag-panchami/) - ‘श्रावण मास की नागपंचमी तिथि’ को नाग की पूजा करने से सभी विष-दोष दूर होते हैं, नाग अभय वरदान देने वाले होते हैं और यह पञ्चमी सर्प-दंष्ट्री प्राणी को मुक्ति दिलाने वाली होती है। | नाग-पञ्चमी - [नागपंचमी क्यों मनाएं?](https://test.lifescience-forum.com/why-celebrate-nagpanchami/) - यह सनातन धर्म की महिमा है जो सर्पो का सम्पूर्ण विवरण देती है तब मनुष्य के लिए क्या कहा जाय। इसलिए एक बार अपने शास्त्रों को जरूर पढ़िये। - [वागवै यज्ञ:](https://test.lifescience-forum.com/vaani/) - खाये हुए अन्न का सूक्ष्म अंश, मन हो जाता है। पीये हुए जल का सूक्ष्म भाग, प्राण होता है। भक्षण किये हुए तेज (घृत, तेल आदि) का जो सूक्ष्म भाग है, वह वाणी होता है। इसलिए मन अन्नमय है, प्राण जलमय है और वाणी तेजोमय है। | वागवै यज्ञ: - [अभिनव-जलधर-सुन्दर! धृतमन्दर! जय जय देव हरे!](https://test.lifescience-forum.com/krishn-leela/) - ईश्वर की लीला का अर्थ है – ईश्वर की रहस्यपूर्ण क्रीड़ा! जब कोई संघटना मानव बुद्धि के परे घटित होती है तो उसे ईश्वरीय लीला कहते हैं। महापुरुषों अथवा अवतार के चरित्र भी लीला कहे जाते हैं, जैसे रामलीला, कृष्णलीला आदि। | अभिनव-जलधर-सुन्दर! धृतमन्दर! जय जय देव हरे! - [भगवती ‘बगलामुखी’](https://test.lifescience-forum.com/baglamukhi/) - दश महाविद्याओं में से एक (पृष्ठस्तव या देवी बगला शत्रुसूदिनी) भगवती ‘बगलामुखी’ (वलगामुखी, बगला, पीताम्बरा, वल्गामुखी) ही श्रुति में वर्णित ‘कृत्या-वल्गा’, ‘वलगहन’ हैं। | भगवती ‘बगलामुखी’ - [जल ही जीवन](https://test.lifescience-forum.com/save-water/) - संस्कृत में 'समीप' शब्द का प्रयोग सबसे पहले 'जल के निकट' अर्थ को प्रकट करने के लिये ही प्रचलित हुआ था। “द्वयन्तरुपसर्गेभ्योऽप ईत्” (अष्टाध्यायी सूत्र ६.३.६७) के अनुसार 'सम् +अप्' से यह शब्द विकसित है। | जल ही जीवन - [नारी विमर्श](https://test.lifescience-forum.com/stree/) - नारी का मानना है कि उस पर विमर्श का सिर्फ उसे ही अधिकार है, यह पुरुष क्यों चर्चा के लिए चिल्लाता है। पुरुष के भागीदार होने का कारण है कि वह स्त्री से पैदा होता है उसकी माता, बहन और पत्नी भी स्त्री ही है। पिछले दिनों दो तरह की नारियों पर खूब चटकारे लेकर चर्चा हुई, पहली एस० डी० एम० ज्योति मौर्य और दूसरी सीमा हैदर। दोनों मामलों में अपने विवाहित पति को छोड़ कर नए साथी की तलाश में एक ने पाकिस्तान छोड़ा और एक ने परिवार। इसमें में दो तरह की चर्चा है, पहली दोनों ने अपने नारी विमर्श - [डाकोर का इतिहास](https://test.lifescience-forum.com/history-of-dakor/) - 72 साल की आयु में जब उनकी शारीरिक शक्ति जवाब दे गई तो स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने सपने में उन्हें दर्शन देकर कहा कि तुम अब मत आया करो, पर विजय सिंह जी नहीं माने। तो भगवान ने कहा ठीक है। अगली कार्तिक पूर्णिमा को बैलगाड़ी लेकर आना और मैं तुम्हारे साथ चलूंगा। | डाकोर का इतिहास - [Advantages of Lukewarm Water Gargle and Steam Inhalation in COVID-19](https://test.lifescience-forum.com/advantages-of-lukewarm-water-gargle-and-steam-inhalation-in-covid-19/) - As per discussion with Dr Gokul Bora the renowned pediatrician of Assam, I want to state that the corona virus is not vulnerable to heat. | Advantages of Lukewarm Water Gargle and Steam Inhalation in COVID-19 - [Beginning of a Hopeful 2021](https://test.lifescience-forum.com/beginning-of-a-hopeful-2021/) - Last year 2020 had a severe effect on people's mind; people from all over the world were very much frustrated due to the pandemic, COVID-19. Keeping aside all these negative impacts, I firstly want to wish you all a vibrant and a Happy New Year. I hope this year would sail off smoothly, washing away Beginning of a Hopeful 2021 - [Aatmanirbhar Bharat](https://test.lifescience-forum.com/aatmanirbharat-bharat/) - आत्मनिर्भरता (Self-reliance) refers to a person's condition that he not depend on another person for any work. Self-reliance is a positive word, it is very important for a person, family, society, or country. | Aatmanirbhar Bharat - [Agni Purana](https://test.lifescience-forum.com/agni-purana/) - One who listen the shlokās of this purana gets the phalā of the तिल-सुवर्ण Daan and the one who recites a whole chapter will definitely get the phalā of Gau Daan.| Agni Purana - [मम संसारा](https://test.lifescience-forum.com/mam-sansara/) - इस उद्घोषणा को आत्मसात करने पर मुख्य समस्या है स्वयं का (भाग) अन्य के लिए छोड़ना। आपके सुख में थोड़ी कटौती का अर्थ है अन्य के खुशी में कुछ अधिक जुड़ाव। | मम संसारा - [शिवविवाह कथा रामचरित मानस से (भाग- 1 आरंभ)](https://test.lifescience-forum.com/shiv-vivah-manas/) - श्रीरामचरित मानस में जब-जब "एक बार" शब्द का प्रयोग हुआ तब-तब कथा सामान्य चलते प्रसंग से कहीं और मुड़ गयी है या कोई नयी घटना हुयी है जिसने भविष्य की कथा की नींव रखी है। | शिवविवाह कथा रामचरित मानस से (भाग 1 आरंभ) - [जीव बोध](https://test.lifescience-forum.com/jeev-bodh/) - मनुष्य मांस के बगैर भी जीवन जीता रहा है। यदि आप मनुष्य हैं तब आपकी मनुष्यता दिखनी चाहिए। जीवों पर दया करिए, उन्हें भी हमारी तरह जीने का पूरा अधिकार है। | जीव बोध - [समाज और धर्म](https://test.lifescience-forum.com/society-and-religion/) - एक देश अपने समाज से निर्मित होता है। वह समाज कुटुम्ब अर्थात परिवार आधारित होता है। भारत में एक समय संयुक्त परिवार की परिपाटी थी किंतु आज न्यूक्लियर फेमिली (एकल परिवार) का युग है। | समाज और धर्म - [भूतभावन भगवान भोलेनाथ](https://test.lifescience-forum.com/bhagwan-shiv/) - पुराणों के शिव अत्यन्त कल्याणमय, भक्तों पर सदा कृपा करने वाले तथा दीनों पर अनुग्रह करने वाले देव है। वैदिक रुद्र आशुरोष हैं तो शिव आशुतोष। | भूतभावन भगवान भोलेनाथ - [रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग की स्थापना](https://test.lifescience-forum.com/rameshwaram/) - काश रामानुज लक्ष्मण ने सुर्पणखा की नाक न कटी होती, काश रावण के मन में सुर्पणखा के प्रति अगाध प्रेम न होता, गर बदला लेने के लिए सुर्पणखा ने रावण को न उकसाया होता, रावण के मन में सीता हरण का ख्याल कभी न आया होता। - [इसे डेमोक्रेसी कहते हैं](https://test.lifescience-forum.com/its-called-democracy/) - नेता प्रतिपक्ष हो, मुख्यमंत्री हो, मंत्री या प्रवक्ता हो, आज जिसके पक्ष में हैं कल उसी की आलोचना करते हैं, थाली के बैगन हो गये हैं। नाम के ही नेता हैं बाकी तो वह राजनीति के व्यापारियों से भी आगे निकाल गए हैं। | इसे डेमोक्रेसी कहते हैं - [२०५० का हिन्दू समाज](https://test.lifescience-forum.com/2050-hindu-society/) - प्रकृति परिवर्तन का नाम है। मनुष्य परिवर्तन को लेकर सदा आतुर रहता है। आइये इस लेख में २०५० के भयानक परिवर्तन को देखें। अब तक लोग गांव से शहर जाते थे, किन्तु अब शहर गांव में आ गया है वह भी अपनी बुराइयों के साथ। | २०५० का हिन्दू समाज - [शबरी के राम](https://test.lifescience-forum.com/shabri-and-ram/) - [कटते जानवर मनते त्यौहार](https://test.lifescience-forum.com/animal-sacrifice/) - मनुष्य अपने कुतर्कों से अपने पापों को छिपा नहीं सकता है, उसके वर्तमान के व्यवहार पर उसका भविष्य निर्भर करेगा। ईश्वर ने सदा न्याय किया है और न्याय करेगा। यही बकरा कल हाजी मियां बनेगा और बकरीद के दिन तुम्हें जिबह करेगा। | कटते जानवर मनते त्यौहार - [वर्ण कर्म से अथवा जन्म से?](https://test.lifescience-forum.com/varna-by-birth/) - निष्कर्ष यह निकला कि आत्मा का बल (वीर्य) जन्म से ही प्राप्त होता है, अतः वर्ण जन्म से सिद्ध है। | वर्ण कर्म से अथवा जन्म से? - [मैं ब्राह्मण हूँ](https://test.lifescience-forum.com/i-am-brahmin/) - एक बार एक अंग्रेज गवर्नर से हाउस ऑफ कॉमन्स में पूछा गया कि भारत मे ईसाई धर्म के प्रसार में क्या दिक्कत हो रही है जबकि शासन और संसाधन हमारे पास हैं तब उसने कहा था कि ब्राह्मण अपने धर्म की रक्षा के लिए खड़ा है। - [क्या शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद ग्रहण किया जा सकता है?](https://test.lifescience-forum.com/shiva-prasad/) - [राम से बड़ा राम का नाम](https://test.lifescience-forum.com/raam-naam/) - [श्री काशी विश्वनाथ मंदिर](https://test.lifescience-forum.com/kashi-vishwanath/) - [श्रीकृष्ण दर्शन को भगवान शिव ने बनाया था जोगी रूप](https://test.lifescience-forum.com/krishna-darshan/) - [कलियुग का महाभारत](https://test.lifescience-forum.com/kaliyug-mahabharat/) - [मंत्र का प्रभाव](https://test.lifescience-forum.com/effect-of-mantra/) - वर्तमान में आवश्यकता है कि सभी ब्राह्मण पुनः अपने मूल ब्राह्मणोचित कर्म से जुड़ें, अपने संस्कारों को जाने और माने। "ब्रह्म रूप में जो लीन सो ही ब्राह्मण।" यदि ब्राह्मण केवल अपने कर्म करे, तो फिर उसके देवत्व को कोई नहीं रोक सकता। | मंत्र का प्रभाव - [नृत्य और शिव](https://test.lifescience-forum.com/shiva-nritya/) - [सनातन धर्म का आधार - (स्वरोदय विज्ञान)](https://test.lifescience-forum.com/swarodaya-vigyan/) - [सत्संग बड़ा है या तप?](https://test.lifescience-forum.com/satsang-bigger-or-tapa/) - [मूर्ति पूजा](https://test.lifescience-forum.com/idol-worship/) - [क्यों चढ़ाते हैं शनि देव को तेल](https://test.lifescience-forum.com/why-oil-is-offered/) - [श्री शिवमहिम्न स्तोत्रम्](https://test.lifescience-forum.com/shiv-mahimna-stotram/) - [सोमवार, भगवान शिव का दिन](https://test.lifescience-forum.com/somawar-bhagwan-shiv/) - [भगवान शिव का अमोघ एवं सरल मंत्र](https://test.lifescience-forum.com/om-namah-shivay/) - [मदद करने का अंदाज](https://test.lifescience-forum.com/help/) - [सनातन संस्कृति और शिक्षा का प्रभाव](https://test.lifescience-forum.com/influence-of-education/) - [नीच व्यक्तियों को संकट के समय ही धर्म की याद आती है](https://test.lifescience-forum.com/karna-mahabharat/) - [शिक्षाप्रद लघु दृष्टांत](https://test.lifescience-forum.com/enlightening-story/) - [संगति, परिवेश और भाव](https://test.lifescience-forum.com/sangati/) - [प्रेम की पराकाष्ठा](https://test.lifescience-forum.com/culmination-of-love/) - [छोटे से मंत्र का जप करने से क्या होगा?](https://test.lifescience-forum.com/mantra-jap/) - [एक दोहे का प्रभाव](https://test.lifescience-forum.com/dohe-ka-prabhav/) - [एक बच्चा जब गुरु बना - (ज्ञान का प्याला)](https://test.lifescience-forum.com/child/) - [माँ का तोहफा](https://test.lifescience-forum.com/maa-ka-tohfa/) - [औघड़दानी भगवान शिव](https://test.lifescience-forum.com/bhgwan-shiva/) - [शिव जी के मुंड माल का रहस्य](https://test.lifescience-forum.com/mund-maal-of-shiva/) - [भगवान का अस्तित्व](https://test.lifescience-forum.com/existence/) - [हवन - एक विश्लेषण](https://test.lifescience-forum.com/hawan/) - [हर - हर महादेव](https://test.lifescience-forum.com/har-har-mahadeva/) - [शिव जी भांग पीते हैं?](https://test.lifescience-forum.com/shiv-ji/) - [अद्भुत एवं प्रेरणादायक प्रसंग - (कर्म का सिद्धांत)](https://test.lifescience-forum.com/karma-siddhanta/) - [प्रार्थना का प्रभाव](https://test.lifescience-forum.com/prayer/) - [शिव के अवतार 'पिप्पलाद'](https://test.lifescience-forum.com/pippalad/) - [मनुष्य का धर्म](https://test.lifescience-forum.com/dharma-2/) - [काशी नगरी निवासिनी मां अन्नपूर्णा](https://test.lifescience-forum.com/ma-annapurana/) - [स्वस्तिक का रहस्य](https://test.lifescience-forum.com/swastik/) - [आरती का अर्थ, विधि तथा महत्व](https://test.lifescience-forum.com/importance-of-aarti/) - [चरणामृत और पंचामृत](https://test.lifescience-forum.com/charanamrit/) - [जब घटोत्कच विभीषण से कर लेने गया था लंका](https://test.lifescience-forum.com/ghatotkach/) - [श्रावण, शिवजी का प्रिय मास](https://test.lifescience-forum.com/shrawan-maas/) - [राजा भर्तृहरि की कथा](https://test.lifescience-forum.com/raja-barthari/) - [दायित्व, पुण्य और धर्म](https://test.lifescience-forum.com/dayitwa-punya-and-dhrama/) - [क्या मूल्य है एक बार “राम” नाम जपने की?](https://test.lifescience-forum.com/ram-naam/) - [दर्शन और देखने में अंतर](https://test.lifescience-forum.com/darshan/) - [राजा की तीन सीखें](https://test.lifescience-forum.com/raja-ki-seekhen/) - [व्यक्ति की सुंदरता](https://test.lifescience-forum.com/vyakti-ki-sundarta/) - [पुराणों की सत्यता](https://test.lifescience-forum.com/puran/) - [वास्तविक शिक्षा](https://test.lifescience-forum.com/real-education/) - [भारतीय शिक्षा में सुधार](https://test.lifescience-forum.com/indian-education/) - [धर्मो रक्षति रक्षितः](https://test.lifescience-forum.com/dharmo-rakshathi-rakshithaha/) - अर्थात, धर्म का लोप कर देने से वह लोप करने वालों का नाश कर देता है और रक्षित किया हुआ धर्म रक्षक की रक्षा करता है। इसलिए धर्म का हनन कभी नहीं करना चाहिए, जिससे नष्ट धर्म कभी हमको न समाप्त कर दे। | धर्मो रक्षति रक्षितः - [प्राणायाम](https://test.lifescience-forum.com/pranayam/) - शास्त्रों के अनुसार विचार करें अथवा आधुनिक विज्ञान के अनुसार, उपरोक्त तथ्यों से इस बात की पुष्टि होती है कि प्राणायाम करने से शरीर को ‘प्राण’ के रूप में अतिरिक्त ऊर्जा का लाभ मिलता है जिससे लंबी आयु भी मिलती है। | प्राणायाम - [पूजन, अनुष्ठान आदि के संकल्प में अपना उपनाम छोड़ कर शर्मा, वर्मा, आदि उपनाम क्यों लिये जाते हैं?](https://test.lifescience-forum.com/sirname/) - अपने-अपने निर्धारित नियमों अर्थात् धर्म की उपयोगी शक्ति की वृद्धि करने के लिए योग्य कर्म करना तथा अपने-अपने नियम की उपयोगी शक्ति का नाश करने वाले कर्म का परित्याग करने के भाव में पूजन अनुष्ठान आदि के संकल्प के समय अपना उपनाम छोड़ कर “शर्मा अहं”, “वर्मा अहं”, आदि उपनाम लिए जाते हैं। | पूजन, अनुष्ठान आदि के संकल्प में अपना उपनाम छोड़ कर शर्मा, वर्मा, आदि उपनाम क्यों लिये जाते हैं? - [सकल ताड़न के अधिकारी](https://test.lifescience-forum.com/casteism/) - भारत विश्व की प्रयोगशाला रहा है, उन्नत मस्तिष्क को जातीय और आरक्षण के विष से पाट दिया गया। हिन्दू जनमानस यह प्रश्न भूल गया कि जो सनातन व्यवस्था हजारों साल से चली आ रही है, वह शोषणकारी कैसे हो गई और विदेशी आक्रांता उद्धारक कैसे बन गये? | सकल ताड़न के अधिकारी - [तुलसीदास हाजिर हो](https://test.lifescience-forum.com/tulsidas-hazir-ho/) - समस्या शिक्षा का जबरदस्तीकरण भी है। जिस तरह से बंदर के हाथ मे चाकू पकड़ाने से विकट स्थिति उत्पन्न होती है, उसी प्रकार निरे-लम्पट को शिक्षित करने से होती है। लो तुम भी कुछ पढ़ लो, आगे बहुत काम आने वाली है। इसी से नौकरी और छोकरी का सहज प्रबंध हो जायेगा ।| - [सही गलत](https://test.lifescience-forum.com/right-wrong/) - कौन सा धर्म सही है, किसमे लोगों को समझने की क्षमता है - के स्थान पर विचार बना लिया गया है कि मेरा वाला ही श्रेष्ठ है। इसलिए मेरा वाला ही अन्य को भी स्वीकार होना चाहिए। | सही गलत - [विविधं ज्ञानं - विज्ञानम्](https://test.lifescience-forum.com/science/) - आत्मनिष्ठ मानव को सर्वत्र समादृष्टि ही रखनी चाहिए एवं इस समदृष्टि को आधार बना कर ही इसे प्रकृतिभेद भिन्न लौकिक व्यवहारों में देश-काल-पात्र-द्रव्य-श्रद्धादि के तारतम्य से विभक्त-व्यवस्थित रूप से ही प्रवृत्त रहना चाहिए। | विविधं ज्ञानं - विज्ञानम् - [उपनिषदों का ज्ञान - ३ (प्राण)](https://test.lifescience-forum.com/upanishad-gyan-3/) - विश्व में सूक्ष्म से विशालतम जन्तुओं के प्राण को ही प्रतिष्ठा स्वरूप मानते हुए उन्हें एक सामान्य नाम दिया गया - ‘प्राणी’। अर्थात् ये सभी प्राण ग्रहण करने वाले हैं। | उपनिषदों का ज्ञान - ३ (प्राण) - [उपनिषदों का ज्ञान - २ (तैत्तिरीयोपनिषद् - ब्रह्मसूत्र का आधार)](https://test.lifescience-forum.com/upanishad-gyan-2/) - वेदव्यासजी की दृष्टि में तैत्तिरीयोपनिषद् का कितना महत्व था, यह इसी बात से स्पष्ट हो जाता है कि उन्होंने अपने सूत्रों के आदि से अन्त तक के प्रत्येक सूत्र इसी उपनिषद् के आधार पर रखे। | उपनिषदों का ज्ञान - २ (तैत्तिरीयोपनिषद् - ब्रह्मसूत्र का आधार) - [उपनिषदों का ज्ञान - १ (अक्षर - ओम्)](https://test.lifescience-forum.com/upanishad-gyan-1/) - उस तत्व को ब्रह्मवेत्ता ‘अक्षर’ कहते हैं। वह न मोटा है, न पतला है, न छोटा है, न बड़ा है, न लाल है, न द्रव है, न छाया है, न अन्धकार है, न वायु है, न आकाश है, न संगवान् है, न रस है, न गन्ध है, न नेत्र है, न कान है, न वाणी है, न मन है, न तेज है, न प्राण है, न मुख है, न माप है, उसमें न भीतर है, न बाहर है; वह कुछ भी नहीं खाता, उसे कोई भी नहीं खाता। | उपनिषदों का ज्ञान - १ (अक्षर - ओम्) - [यज्ञ - सृजन का कारण](https://test.lifescience-forum.com/yagya-the-cause-of-creation/) - यज्ञ को एक प्रकार का ऐसा यंत्र समझना चाहिये जिसके सभी पुर्जे ठीक-ठीक स्थान पर बैठे हों, या यह एक ऐसी जंजीर है जिसकी एक भी कड़ी कम न हो, या यह एक ऐसी सीढ़ी है जिससे स्वर्गारोहण किया जा सकता है, या यह एक ऐसा व्यक्तित्व है जिसमें समस्त मानवीय गुण है। | यज्ञ - सृजन का कारण - [अश्वत्थ](https://test.lifescience-forum.com/ashwattha/) - उर्ध्वमूल कहने का कारण यह है कि जैसे ‘मूल’ वृक्ष का आधार होता है, मूल ही प्रधान होता है ऐसे ही परमात्मा इस सम्पूर्ण जगत् के आधार हैं, प्रधान हैं और उन्हीं से इस संसार वृक्ष की उत्पत्ति और विस्तार हुआ है।| अश्वत्थ - [गुलामी पूर्व भारत में जाति व्यवस्था](https://test.lifescience-forum.com/caste-system-in-india/) - मेगस्थनीज का अनुसार यह ही तब की जातियां हैं जिसमें तब के भारत के मनुष्य विभक्त थे (The population of India is divided into 7 endogamous and hereditary castes). अपनी जाति के बाहर कोई विवाह नहीं कर सकता था और ना ही एक दूसरे का कार्य ही कर सकता था | गुलामी पूर्व भारत में जाति व्यवस्था - [मंत्रों की शक्ति](https://test.lifescience-forum.com/power-of-mantras/) - सबसे पहले वैदिक मंत्रों में अधिकार की बात आती है। यजुर्वेद २६/२ में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वेद वाणियों का उपदेश ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, प्रिय या अप्रिय सभी के लिए किया गया है। | मंत्रों की शक्ति - [वर्णव्यवस्था में वर्ण धर्म](https://test.lifescience-forum.com/varna-dharma-in-sanatan-system/) - कर्मफल की बात करें तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र यह सभी अपने - अपने वर्ण के अनुसार निर्दिष्ट कर्म करने मात्र से धार्मिक बन जाते हैं और उन्हें परमपिता परमात्मा की प्राप्ति होती है। | वर्णव्यवस्था में वर्ण धर्म - [गोधन पर निर्भर मानव जीवन का अस्तित्व](https://test.lifescience-forum.com/existence-of-human-life/) - यंत्रों और मशीनों की सहायता से विकास तभी विकास कहलाता है जब यंत्रों के साथ मानव और पशुधन को सम्मिलित करते हुए क्षमता बढ़ाई जाए, मानव और पशुधन का प्रयोग कम न हो लेकिन जब यंत्र/मशीन मनुष्य और पशुधन का स्थान लेने लगेंगे तभी यह विकास, विनाशक बन जायेगा।| गोधन पर निर्भर मानव जीवन का अस्तित्व - [एकत्ववाद की अवधारणा](https://test.lifescience-forum.com/concept-of-monotheism/) - यह ‘एक पुरुष’ है, जिसमें सम्पूर्ण मानव जाति सम्मिलित है। सारी मानव जाति मिलकर एक विराट् देह है। प्रत्येक मनुष्य समझे कि मैं इस देह का एक अवयव या भाग हूँ। अर्थात सम्पूर्ण मानवजाति रूप एक पुरुष है, सब मानव उसके सिर, हाथ, पेट, पांव हैं। | एकत्ववाद की अवधारणा - [भारत से हिंदुस्तान और इंडिया तक](https://test.lifescience-forum.com/bharat-to-india/) - सर्वप्रथम, हिंदू शब्द की उत्पत्ति पर विचार करें तो यह शब्द 'सिंधु' से आया है। सिंधु अथवा सिंध शब्द को हिंदू या हिन्द भी भारतीयों ने ही कहना शुरू किया। आज भी गुजरात में 'स' को 'ह' उच्चारित किया जाता है, सकारात्मक को हकारात्मक कहा जाता है। भारत से हिंदुस्तान और इंडिया तक - [तृन धरि ओट कहति बैदेही](https://test.lifescience-forum.com/trini-dhari-ot-kahati-vaidehi/) - सीता जी के विषय में वाल्मीकि रामायण (जो सबसे अधिक प्रमाणिक है) के अनुसार विचार करने पर इतना तो स्पष्ट हो ही जाता है कि जगतजननी माता सीता रावण को कभी भी भस्म कर सकती थीं। तृन धरि ओट कहति बैदेही - [भारतीय संस्कृति](https://test.lifescience-forum.com/indian-culture/) - 'सम्' उपसर्गपूर्वक 'कृ' धातु से भूषण अर्थ में सूट् का आगमन होने पर 'क्तिन्' प्रत्यय के समन्वय से "संस्कृति" शब्द बनता है जिसका अभिप्राय है- 'भूषण भूत सम्यक कृति'। जिन प्रयत्नों द्वारा मनुष्य के जीवन में वेदोक्त विधियों से उत्थान हो, ऐसे प्रयत्न 'भूषण भूत सम्यक कृति' कहे जाते हैं। भारतीय संस्कृति - [मानवता का उद्भव और विकास](https://test.lifescience-forum.com/humanity/) - मानवता का अर्थ 'मनुष्यपन' है। वास्तव में मानवता का अर्थ 'मनु के कुल में उत्पन्न' है। अर्थात 'मानवता का अर्थ 'मनु के कुल की शोभा बढ़ाने वाला आचरण करने वाले मनुष्य का मनुष्यपन' है। हमें आज 'मानवता' का अर्थ 'मनुष्यपन' ही ध्यान में रखना है और यह मनुष्यपन मनुष्य में किस रीति से विकसित होता है, इसपर विचार करना है। - [मन्वन्तर और सप्तर्षि](https://test.lifescience-forum.com/satpa-rishi-part-2/) - प्रत्येक मन्वन्तर में सप्तर्षि भिन्न - भिन्न नाम रूपों से अवतरित होते हैं। पुराणों में इसका विस्तार से वर्णन मिलता है। उदाहरण के रूप में विष्णु पुराण में चौदह मन्वन्तरों के सप्तर्षियों का नाम दिए गए हैं। - [सप्तर्षियों का अवतरण](https://test.lifescience-forum.com/sapta-rishi/) - सृष्टि के विस्तार के लिए ब्रह्मा जी ने अपने ही समान दस मानस पुत्रों को उत्पन्न किया। उनके नाम हैं - मरीचि, अत्रि, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, भृगु, वसिष्ठ, दक्ष तथा नारद। - [मांसाहार, विनाश का द्वार](https://test.lifescience-forum.com/non-veg-gate-of-destruction/) - मनुष्य दो प्रकार के हैं– देवता और असुर। जिसके हृदय में दैवी सम्पत्ति कार्य करती है वह देवता है तथा जिसके हृदय में आसुरी सम्पत्ति कार्य करती है वह असुर है। मनुष्य की तीसरी कोई जाति सृष्टि में नहीं है। - [महाबली भीम और हनुमान](https://test.lifescience-forum.com/bheem-and-hanuman/) - हे कमलनयन भीम ! मैं वानरश्रेष्ठ केसरी के क्षेत्र में जगत के प्राण स्वरूप वायुदेव से उत्पन्न हुआ हूँ। मेरा नाम हनुमान वानर है। - [भीम में कैसे आया १० हज़ार हाथियों का बल?](https://test.lifescience-forum.com/bheem/) - तब आर्यक ने वासुकि से कहा कि भीम को उन कुण्डों का रस पीने की आज्ञा दी जाए जिनमें हजारों हाथियों का बल है। - [हिन्दू, धर्म या जीवन पद्धति?](https://test.lifescience-forum.com/hindutva-a-dharma/) - हिन्दू या वैदिक सनातन निःसंदेह 'धर्म' है और यह 'धर्म' ही 'जीवन जीने की पद्धति' है। - [Facts about Coronaviruses](https://test.lifescience-forum.com/facts-about-coronaviruses/) - Coronaviruses are so named because of their characteristic solar corona (crown-like) appearance when observed under an electron microscope. | Facts about Coronaviruses - [Think Twice before Acting](https://test.lifescience-forum.com/think-twice-before-acting/) - One that reflects long before he acts is certainly possessed of great intelligence. Such a man never offends in respect of any act. | Think Twice before Acting - [सतयुग कब आयेगा?](https://test.lifescience-forum.com/satya-yuga/) - मानव गणना के अनुसार 71 चतुर्युग (एक मन्वंतर) में 12000×360 = 4320000 मानव वर्ष होते हैं। - [Self realization](https://test.lifescience-forum.com/self-realization/) - He must be something beyond the body, the vital and the mind. That is the Indweller, the Antarātmā. He I am “सोऽहम्”. | Self realization - [Ayurveda – Indian system of Medicine](https://test.lifescience-forum.com/ayurveda-indian-system-of-medicine/) - The ancient Indian wisdom of healing (or medicine) known as Āyurveda, is a part of the spiritual tradition of the Vedas. The Vedas include almost every aspect of life. | Ayurveda – Indian system of Medicine - [True Humanity](https://test.lifescience-forum.com/true-humanity/) - To be happy in one’s own happiness and sad in one’s own sadness is beastliness, while to be happy in others’ happiness and sad in others’ sadness is humanity. | - [Veda - India’s Science base](https://test.lifescience-forum.com/veda-indias-science-base/) - The scientific aspects of Vedas have already been attracting attention world-wide and it is hoped that the future rests on development of mankind along the righteous ways, which the modem science, strives for and the vedas stand for. | Veda - India’s Science base - [God is Waiting for Us](https://test.lifescience-forum.com/god-is-waiting-for-us/) - If besides the one God, if all other wants are renounced, then God will come without our calling and the world will disappear for you without trying. | God is Waiting for Us - [HINDUTVA IDEOLOGY](https://test.lifescience-forum.com/hindutva-ideology/) - Hindutva, a word synonymous with psyche of people in India with offshoots enveloping the globe, is in the right perspective - a philosophy, a way of life. Mysticism spread in the world from Hindutva with civilization dating back to Aryan era. | HINDUTVA IDEOLOGY - [AN IMPLICATION OF HINDU GOTRA SYSTEM IN RELATION TO GENETICS](https://test.lifescience-forum.com/an-implication-of-hindu-gotra-system-in-relation-to-genetics/) - In Hinduism, the Gotra system has its own significance in referring to people who are descendants in an unbroken male ancestor or patriline. The applied aspect of such a ritual is scientifically approved in preventing genetical disorders. - [धर्म और विज्ञान](https://test.lifescience-forum.com/religion-and-science/) - सनातन धर्म का विज्ञान इतना विकसित रहा है कि आज तक भी आधुनिक विज्ञान केवल उनके किसी सूत्र को सुलझा ले, इतने तक का ही खोज कर पाया है। - [आध्यात्मिक विज्ञान](https://test.lifescience-forum.com/god-and-soul/) - आत्मा को न शस्त्र काट सकते हैं, न अग्नि जला सकती है, न इसे जल गिला कर सकता है और न ही वायु इसे सुखा सकती है। - [उम्मीद का दीया](https://test.lifescience-forum.com/expectation/) - इसलिए अपने घर में, अपने मन में हमेशा उम्मीद का दीया जलाए रखिये। चाहे सब दिए बुझ जाएँ लेकिन उम्मीद का दीया नही बुझना चाहिए। ये एक ही दीया काफी है बाकी सब दीयों को जलाने के लिए। - [डॉ भीमराव अम्बेडकर](https://test.lifescience-forum.com/b-r-ambedkar/) - अम्बेडकर चाहते थे कि हिंदू और बौद्ध बाहुल्य इलाके भारत में रहें और मुस्लिम बहुल इलाके यानी कश्मीर घाटी समेत कुछ अन्य इलाके भी पाकिस्तान को दे दिए जाएं। क्या आज कोई इस विचार का समर्थन करेगा? - [भारतीय संस्कृति और शिक्षा](https://test.lifescience-forum.com/indian-culture-and-education/) - गुरुकुलों के वैदिक युगीन शिक्षा व्यवस्था को अब फिर से समाज को अपनाना होगा, केवल तभी आप अपनी आने वाली पढ़ी को एक सुरक्षित, सुदृढ़ और बेहतर भविष्य दे सकेंगे। - [सत्य क्या है?](https://test.lifescience-forum.com/truth/) - वो सभी बातें सत्य की श्रेणी में ही आती हैं जैसे आकाश नीला है, चीनी गुड़ या मिठाई मीठी है, आदि, लेकिन मनुष्य के जीवन का पहला सत्य उसका जन्म है और आखिरी सत्य है मृत्यु। - [कर्म, भाग्य और ज्योतिष](https://test.lifescience-forum.com/karma-fortune-and-astrology/) - वे हमारे कर्म के फल ही हैं जो भाग्य कहलाते हैं और उनको सही रूप से क्रियान्वित करने के लिए जो सटीक गणना या विज्ञान है वही ज्योतिष है। - [लखन पटवारी](https://test.lifescience-forum.com/लखन-पटवारी/) - एक बार नारद मुनि और यमराज में इस बात पर बहस शुरू हुई कि मनुष्य का स्वभाव कैसा होता है? यमराज का तर्क था कि 'मनुष्य' एक सीधा प्राणी है, कर्म करता है और अच्छे फल पर प्रसन्न और बुरे फल पर दुखित या पश्चातापी होता है। - [कलियुग में निषिद्ध कर्म](https://test.lifescience-forum.com/kaliyug-karma/) - प्रत्येक युग की अपनी महिमा होती है, उसी के अनुसार उस युग के विहित और निषिद्ध कर्म भी नियत किए गए हैं। इस प्रकार एक युग में जो नियत कर्म है; वही दूसरे युग में निषिद्ध या निन्दित भी हो सकता है। अतः इसे जानना और समझना धर्मपरायण व्यक्ति के लिए आवश्यक हो जाता है। | कलियुग में निषिद्ध कर्म - [जाति शब्द की उत्पत्ति](https://test.lifescience-forum.com/origin-of-jati/) - ‘जाति’ शब्द की उत्पत्ति संभवतः वैदिक शब्द ‘ज्ञाति’ से हुई है। ‘ज्ञाति’ शब्द ‘एक ही परिवार अथवा कुल में उत्पन्न’ मनुष्यों के लिए ऋग्वेद ७.५५.५, १०.६६.१४, १०.८५.२८ आदि में आया है। | जाति शब्द की उत्पत्ति - [मानस-पूजा](https://test.lifescience-forum.com/manas-puja/) - मन द्वारा कल्पित श्री भगवान के प्रतीक रूप (मूर्ति) अथवा साकार रूप भगवान की भावना से कल्पित सामग्रियों से सेवा, अर्चना और पूजा को मानस-पूजा कहते हैं। | मानस-पूजा - [मरता समाज होता व्यापार](https://test.lifescience-forum.com/dying-society/) - विश्व की राजनीति एक और महायुद्ध की ओर बढ़ रही है। दूसरी ओर भारत में जाति का राजनैतिक नाटक चल रहा है।| मरता समाज होता व्यापार - [अर्धनारीश्वर से सृष्टि की उत्पत्ति](https://test.lifescience-forum.com/ardhnarishwar/) - इसप्रकार भगवान सदाशिव के अर्धनरीश्वररूप से ही सृष्टि की उत्पत्ति हुई। उनका यह रूप यह संदेश देता है कि समस्त पुरुष भगवान सदाशिव के अंश और समस्त नारियां भगवती शिवा की अंशभूता हैं। उन्ही भगवान अर्धनारीश्वर से यह सम्पूर्ण चराचर जगत व्याप्त है। - [स्याद अस्ति](https://test.lifescience-forum.com/syad-asti/) - हम अपने समाज में जो बो रहे हैं, वही काट रहे हैं किंतु मान नहीं रहे हैं। मनुष्य ने झूठ को मित्र, अहंकार को स्वभाव और सत्य को पुस्तकों की चीज बना दिया है।| स्याद अस्ति - [आस्था पर चोट](https://test.lifescience-forum.com/hurt-on-faith/) - हिन्दू धर्म को सॉफ्ट टारगेट क्यों बनाया या समझा जाता है, इसके पीछे का मूल कारण है - चर्चा में आना, नेता बन जाना, अपने जाति-वर्ग और पंथ में प्रधान बन जाना। | आस्था पर चोट - [भगवान भास्कर](https://test.lifescience-forum.com/bhagwan-bhaskar/) - ये (आदित्य) ही ब्रह्मा, विष्णु, शिव, स्कन्द, प्रजापति, इंद्र, कुबेर, काल, यम, चंद्रमा, वरुण, पितर, वसु, साध्य, अश्विनीकुमार, मरुद्गण, मनु, वायु, अग्नि, प्रजा, प्राण और ऋतुओं को प्रकट करने वाले तथा प्रभा के पुँज हैं। | भगवान भास्कर - [हिंदी नाटक दिवस की शुभकामनाएँ](https://test.lifescience-forum.com/hindi-diwas/) - हिंदी दिवस की शुभकामना देकर सरकारी, गैरसरकारी या व्यक्तिगत तौर पर औपचारिकता पूरी जाती है। हिंदी का विस्तार किस प्रकार हो इनका विजन सरकार के पास नहीं है। हिंदी की स्वीकार्यता उत्तर भारत तक सीमित है। | हिंदी नाटक दिवस की शुभकामनाएँ - [सनातन धर्म में मांस भक्षण](https://test.lifescience-forum.com/non-veg-in-sanatan-dharma/) - यजन-याजन में बलि के रूप में उन्हीं वस्तुओं का प्रयोग होता है जिन्हें हम उत्तम मानते हैं। बलि का अर्थ है (√बल् + इन्) आहुति, भेंट, चढ़ावा, नैवेद्य, भोग। परिस्थिति वश हम जो भी खाते थे उन्हीं का बलि के रूप में प्रयोग करने लगे, यही व्यावहारिक भी था। | सनातन धर्म में मांस भक्षण - [दस महाविद्याओं का आविर्भाव](https://test.lifescience-forum.com/das_mahavidya/) - दस महाविद्याओं का संबंध मूलरूप से देवी सती, शिवा और पार्वती से है। ये ही अन्यत्र नवदुर्गा, चामुंडा तथा विष्णुप्रिया आदि नामों से पूजित और अर्चित होती हैं। - [महाभारत](https://test.lifescience-forum.com/mahabharat/) - महाभारत गुढ़ार्थमय ज्ञान-विज्ञान शास्त्र है, राजनीतिक दर्शन है, निष्काम कर्मयोग दर्शन है, भक्ति शास्त्र है, आध्यात्म शास्त्र है, सनातन धर्म का इतिहास है, सर्वार्थसाधक तथा सर्वशास्त्रसंग्रह है। - [योगः कर्मसु कौशलम्](https://test.lifescience-forum.com/skills-of-karma/) - हम जो कोई भी कर्म करें, भगवत्प्रीती के लिए करें, कर्म फल की आशा छोड़ दें तो भगवान् की कृपा से पात्र बनके ज्ञान प्राप्त कर कृतार्थता प्राप्त कर सकेंगे। - [निष्काम कर्मयोग](https://test.lifescience-forum.com/karma-yoga/) - कर्म यदि फलासक्ति भाव को त्याग कर भगवान को समर्पित कर अर्थात 'भगवदर्थ' किये जाएं तो वह 'निष्काम कर्म' कहलाते हैं और यह क्रिया 'निष्काम कर्मयोग' कही जाती है। - [कर्मयोग - सकाम और निष्काम कर्म](https://test.lifescience-forum.com/karma-sakam-nishkam/) - प्रत्येक व्यक्ति प्रतिक्षण कुछ न कुछ करता ही रहता है, चाहे वह जागृत अवस्था में हो या सुषुप्तावस्था में। कर्मरहित होते ही प्राणी निष्प्राण हो जाएगा।| कर्मयोग - सकाम और निष्काम कर्म - [आर्ष ग्रन्थ और भारतीय दर्शन](https://test.lifescience-forum.com/arsha-granth-and-indian-philosophy/) - प्राचीन भारतीय ग्रंथों (वेद, उपनिषद आदि) में जो ज्ञान, विज्ञान आदि जानकारियाँ मिलती हैं वह इतनी सटीक हैं कि यह कहना गलत न होगा कि मनुष्य किसी भी काल में अपने ज्ञान का विस्तार, किसी भी दिशा या क्षेत्र में करेगा, उसका आधार वही ज्ञान होगा। | आर्ष ग्रन्थ और भारतीय दर्शन - [प्रयाग के मेले से लौटते लोग](https://test.lifescience-forum.com/kumbh-in-prayag/) - बयालीस दिन तक चले कल्पवासियो के एक टेंट में साधना आखिरकार पूरी हुई। एक साल से चल रही अर्द्धकुंभ की तैयारी सरकार द्वारा दिव्य कुंभ भव्य कुंभ का नारा सफलीभूत हुआ। - [भारत का ब्राह्मण](https://test.lifescience-forum.com/भारत-का-ब्राह्मण/) - भारत का मानुस अपनी असफलता और बुराई का दोष भाग्य और ईश्वर को देता है समाज की बुराई का श्रेय ब्राह्मण को। - [छोटी घटनाएँ, संकेत बड़े](https://test.lifescience-forum.com/छोटी-घटनाएँ-संकेत-बड़े/) - समस्याएं छोटी हों या बड़ी उनसे परेशानियाँ तो बढती ही हैंI लेकिन समस्याएँ जैसी भी हों संवाद नहीं बंद होने चाहिए I - [भारत का ब्राह्मण -2 (विश्व को ब्राह्मणों ने क्या दिया?)](https://test.lifescience-forum.com/विश्व-को-ब्राह्मण-ने-क्या/) - धन, धरती, स्त्री, सम्मान कोई सुरक्षित नहीं। ऐसे में ब्राह्मण कब तक समय में कमी खोजेगा? उठिए खड़े होइए और इस समाज को जागृत करिये। - [अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता](https://test.lifescience-forum.com/अभिव्यक्ति-की-स्वतंत्रता/) - यह एक बड़ा ही माना हुआ नियम है कि आपके सारे अधिकार, सारी अभिव्यक्ति वहीं समाप्त हो जाती है जहाँ से अगले व्यक्ति की नाक शुरू होती है। - [स्वारथ लागय करै सब प्रीति](https://test.lifescience-forum.com/स्वारथ-लागय-करै-सब-प्रीति/) - स्वार्थ है तो ठीक है नहीं तो किसी को किसी से कोई मतलब नही रहता है स्वार्थ है तो ये प्रेम समझ मे आता है नही तो झूठ लगता है। - [मानवता क्या है?](https://test.lifescience-forum.com/मानवता-क्या-है/) - वेद कहते हैं ‘‘कृण्वन्तो विश्वमार्यम्’’ (ऋग्वेद 9/63/4) अर्थात विश्व के सभी लोगों को श्रेष्ठ गुण, कर्म, स्वभाव वाले बनाओ। वेद स्पष्ट रुप से कहते हैं : मनुर्भव – मनुष्य बनो। - [फेसबुक की दुनियां](https://test.lifescience-forum.com/फेसबुक-कि-दुनियां/) - भारतीय समाज में बढ़ते सोशल मीडिया और लोगों के बदलते स्वाभाव पर एक व्यंग - [लोकतंत्र या भीड़तंत्र?](https://test.lifescience-forum.com/लोकतंत्र-या-भीड़तंत्र/) - आज लोकतंत्र के नए-नए उभरते दोषों को देखकर कई लोग इसे भीड़तंत्र भी कहने लगे हैं। जब हमारा आयु आधारित लोकतंत्र भीड़ तंत्र कहलाने लगा हो तो बुद्धिमानों को चाहिए कि वे लोकतंत्र की वैदिक अवधारणा पर खुले हृदय से विचार करें। - [समर्पण](https://test.lifescience-forum.com/samarpan/) - घुटना टेकना समर्पण नहीं है। हारने का नाम समर्पण नहीं है, कमज़ोर हो जाने का नाम समर्पण नहीं है। समर्पण का अर्थ है, ‘’मैंने अपनी कमज़ोरी को समर्पित किया; अब मेरे में मात्र बल शेष है।’’ - [विवेक चूड़ामणि (सार - संक्षेप)](https://test.lifescience-forum.com/vivek-chudamani-summary/) - ब्रह्म (ईश्वर) के अस्तित्व और स्वरुप पर सर्वथा प्रश्न होते आये हैं। ब्रह्मसूत्र (उत्तर मीमांसा) के प्रथम सूत्र में भगवान वेदव्यास ने कहा “अथातो ब्रह्मजिज्ञासा” अर्थात, ब्रह्म जानने की जिज्ञासा। मीमांसा का अर्थ है ‘जिज्ञासा’। - [चोरी - सीनाजोरी](https://test.lifescience-forum.com/chori/) - नेता बन जाने पर, किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं हो सकती है - संविधान में ऐसा कोई वर्णन भी नहीं है। लेकिन भ्रष्ट नेता लोकतंत्र की दुहाई दे रहा है। | चोरी - सीनाजोरी - [नेता नीति तंत्र लोकतंत्र](https://test.lifescience-forum.com/neta-niti-tantra/) - लोकतंत्र में नेता से लेकर जनता को बोलने की पूरी आजादी होती है। किसान भगवान भरोसे है, उसके हालात की किसी को कोई चिंता नहीं है, चिंता सत्ता की है। | नेता नीति तंत्र लोकतंत्र - [बायकॉट का प्रभाव](https://test.lifescience-forum.com/effect-of-boycott/) - एक बात बिल्कुल स्पष्ट है कि भारत में नैरेटिव सेकुलिरिज्म नहीं चल सकता है। अब्दुल का मजहब मजहबी, गणेश का धर्म बॉलीवुड का प्रैंक! | बायकॉट का प्रभाव - [मोदी की लोकप्रियता](https://test.lifescience-forum.com/modis-popularity/) - आखिर नरेंद्र मोदी लोगों में इतने लोकप्रिय क्यों हो गये है? ताली-थाली से लेकर १५ अगस्त के तिरंगा यात्रा तक, वह जो कहते हैं जनता खुले ह्रदय से करती है। | मोदी की लोकप्रियता - [विपक्ष की आस नीतीश कुमार](https://test.lifescience-forum.com/nitish-kumar/) - प्रश्न वही है कि नीतीश कुमार कितने जनाकांक्षाओं पर खरे उतरते हैं और कितने दिनों तक विपक्ष की एकमात्र कर्ण आस बने रहते हैं। | विपक्ष की आस नीतीश कुमार - [सलमान रुश्दी और जाहिल कौ़म](https://test.lifescience-forum.com/salman-rushdi/) - सलमान रुश्दी विश्व के उन मशहूर लेखकों में से हैं जिन्हें बुकर पुरस्कार के साथ बुकर का बुकर पुरस्कार भी मिला है। वह विश्व के एक अद्भुत राइटर हैं जिनकी कलम कुछ बहुत अलग लिखती है। | सलमान रुश्दी और जाहिल कौ़म - [रक्षाबंधन - धर्म रक्षा सूत्र](https://test.lifescience-forum.com/dharm-raksha-sutra/) - रक्षाबंधन पर्व का इतिहास देखें तो यह बात सामने आती है कि वास्तव में "धर्म की रक्षा" के वचन के साथ इसकी शुरुआत हुई थी। आज भी पुरोहित यजमानों को, बहनें भाइयों को ‘धर्म रक्षा सूत्र’ ही बांधते हैं। | रक्षाबंधन - धर्म रक्षा सूत्र - [प्रस्थानत्रयी में श्रीमद्भगवद्गीता](https://test.lifescience-forum.com/gita-in-prasthanatrayi/) - वेदान्तदर्शन के तीन उपजीव्य स्तम्भ हैं, इन्हीं तीनों को सभी प्राच्य और प्रचित्य विद्वान वेदान्त की ‘प्रस्थानत्रयी’ के नाम से जानते हैं। ये हैं : श्रुति (उपनिषद) स्मृति (श्रीमद्भगवद्गीता) सूत्र (ब्रह्मसूत्र) १. श्रुति : वेद के ज्ञानकाण्डीय श्रुतियों का संकलन ‘उपनिषदों’ के नाम पर किया जाता है। इनमें से वेदान्तदर्शन के सैद्धांतिक विचारों के साथ प्रस्थानत्रयी में श्रीमद्भगवद्गीता - [सेकुलिरिज्म का कीड़ा](https://test.lifescience-forum.com/worm-of-secularism/) - सबसे ज्यादा चिढ़ सेकुलरों को इस लिए मची है क्योंकि कल तक उन्हें बौद्धिक, विद्वान और न जाने क्या-क्या कहा जाता था। और आज उनकी बौद्धिक मॉब लिंचिंग हो गयी, वे गांव के "खौरा कुकुर" हो गये हैं। | सेकुलिरिज्म का कीड़ा - [श्रीकृष्णार्जुन संवाद (गीता) को किस-किस ने सुना?](https://test.lifescience-forum.com/sri-krishnarjunas-samvad-gita/) - अतः श्रीकृष्णार्जुन संवाद (गीता) को अर्जुन, संजय, हनुमानजी और बर्बरीक ने सुना था। किन्तु केवल सुना था, गीता ज्ञान को पुनः ज्यों का त्यों स्वयं भगवान श्री कृष्ण भी कहने में असमर्थ थे। | श्रीकृष्णार्जुन संवाद (गीता) को किस-किस ने सुना? - [भारतीय समुदाय](https://test.lifescience-forum.com/indian-community/) - आप छोटे न हो इसलिए चिन्तन का दायरा विकसित करिये, इससे चिंता मिटेगी, जीवन पशु, पक्षी भी जी लेते हैं लेकिन बिना किसी विचार के। यदि मनुष्य हो, आत्मा हो तो जाग्रत होना होगा | भारतीय समुदाय - [डूबता जहाज](https://test.lifescience-forum.com/dubta-jahaj/) - एक बात सदा महत्वपूर्ण है, ‘बलवान व्यक्ति नहीं उसका समय होता है’, व्यक्ति की जगह समय की पहचान की जानी चाहिए। | डूबता जहाज - [मेरी दिव्य यात्रा का पड़ाव - पंढरपुर](https://test.lifescience-forum.com/pandharpur/) - कोरोना के दौरान मई के महीने में एक दिन रात के स्वप्न में भगवान विट्ठल की नगरी पंढरपुर दिखाई पड़ी। उसी दिन से स्वास्थ्य में सुधार होने लगा। अब एक नई यात्रा पर जाने का समय आ गया था। जुलाई महीने में भगवान विट्ठल की नगरी पंढरपुर कि यात्रा मानो जीवन का अभिन्न अंग बन गई। हम इसे ईश्वरीय प्रेरणा मानते हैं कि २४ जुलाई को हम पुणे नगरी पहुँच गये। | मेरी दिव्य यात्रा का पड़ाव - पंढरपुर - [हमसे क्या छूटा](https://test.lifescience-forum.com/what-did-we-miss/) - क्या आपको पता है कि यह घर जो आपने जिस जगह बनाया है, इसी जगह तोतापुरी आम का पेड़ था जिसमें से पूरा गांव आम खाता था। हम क्या खोते जा रहे हैं, किंचित हमें मालूम नहीं है।| हमसे क्या छूटा - [चले हनुमान आएंगे](https://test.lifescience-forum.com/chale-hanuman/) - घड़ी मुश्किल की आएगी, नहीं आराम आएंगे यह तेरे साथी संगी सब, नहीं तब काम आएंगे राम नाम तू जपना, बैठ कर अकेले में सजीवन हाथ लेकर के, स्वयं हनुमान आएंगे चले हनुमान आएंगे - [ईश्वर का पता](https://test.lifescience-forum.com/ishwar-ka-pata/) - सृष्टि के कण-कण में विराजे, यहीं मिलेंगे यहीं दिखेंगे भाव से ना जो पुकारे, नहीं मिलेंगे नहीं दिखेंगे प्रेम गर चरणों में कर लिया तो एक पता बतलाता हूं जिधर जाएंगे नयन तुम्हारे, वही मिलेंगे वही दिखेंगे ईश्वर का पता - [मुल्ला उवाच:](https://test.lifescience-forum.com/mullah-uvach/) - हम रेगिस्तान वाले रेतीली आंधी से बचने के लिए औरतों को बुर्का पहनाते थे और स्वयं लबादा ओढ़ते थे किन्तु तुम धर्मान्तरित लोगों ने बुरके को मजहब से क्यों जोड़ लिया? तुम्हारे अपने गद्दार लोगों ने कहा कि मन्दिर पर हमला करो, इससे दो लाभ होगा पहला धन मिलेगा और दूसरा हिन्दू टूटेगा और इस्लाम को मानेगा।| मुल्ला उवाच: - [मन्दिर Vs मुस्लिम](https://test.lifescience-forum.com/mandir-vs-muslim/) - वास्तव में भारतीय संस्कृति का एक अध्याय ही मन्दिर है। यही कारण था कि आक्रांताओं ने मन्दिरों को ध्वस्त किया। और इस प्रकार से हिन्दू धर्म को कमजोर करने का प्रयास किया। | मन्दिर Vs मुस्लिम - [भारत की मानसिक दक्षता](https://test.lifescience-forum.com/indias-mental-efficiency/) - विरोध आपका अधिकार है किन्तु राजनीतिक वैमनस्य के लिए आक्रांताओं के वंशजों के पक्ष में तो नहीं खड़ा होना चाहिए, स्मरण रखना चाहिए कि आपके कारण ही 800 वर्ष लग गये दासता की बेड़ियां काटने में। | भारत की मानसिक दक्षता - [भारत के मन्दिर भारत की आत्मा हैं](https://test.lifescience-forum.com/indias-temples-are-the-soul-of-india/) - जिस गजनी के लिए उसका दरबारी और प्रसिद्ध किताब 'किताबुल हिन्द' का रचयिता "अलबरूनी" लिखता है कि 'अल्लाह गजनवी को रहमत बख्से जिसने भारत की हँसती खेलती संस्कृति को तबाह कर डाला।' उसे भी भारत का कन्वर्टेड मुसलमान नायक मानता है। | भारत के मन्दिर भारत की आत्मा हैं - [इस्लाम](https://test.lifescience-forum.com/islam/) - ध्यान रहे कि गोरी, गजनिवियों और बाबरों के लिए एक भी मुस्लिम शर्मिंदा नहीं हुआ न ही अयोध्या, मथुरा और काशी के लिए उन्हें कोई खेद है बल्कि यही उनका मजहब है। | इस्लाम - [भगवान और सांइस में आस्था](https://test.lifescience-forum.com/bhagwan-aur-vigyan/) - तुम्हें भगवान पर विश्वास तो नहीं है। लेकिन उन्हें एक बार जरूर आजमाना। बस एक बात और, मेरे मरने के बाद भी इस दुकान से श्री नारायण जी का कन्हैया जी के रुप में लगी हुई तस्वीर हटाना मत। | भगवान और सांइस में आस्था - [मैंने देखा](https://test.lifescience-forum.com/i-saw/) - मनुष्य ने इतना भौतिक विकास कर लिया है कि अब वह विनाश के पथ पर अग्रसर है, एक बम आज दस करोड़ की आबादी को एक बटन दबाने भर में मार सकता है। | मैंने देखा - [यूक्रेन के अंत में विश्व युद्ध के बादल](https://test.lifescience-forum.com/clouds-of-world-war/) - अमेरिका आधारित विश्व व्यवस्था ने विश्व के मन में आशंका भर दी है, वैसे अभी विश्व युद्ध का समय नहीं है। फिर भी पश्चिमी एशिया की जियोपालिटिक्स कहती है कि युद्ध हो सकता है, कुछ वर्ष के लिए यह युद्ध के पूर्व की शांति भर है। | यूक्रेन के अंत में विश्व युद्ध के बादल - [द कश्मीर फाइल्स और कश्मीर जिहाद](https://test.lifescience-forum.com/the-kashmir-files-and-jihaad/) - जिन हिंदुओं को गुलामी काल में कश्मीर के बर्बर शासकों द्वारा अनेकों प्रयास के बाद भी मातृभूमि से दूर न कर पाया गया उन्हें स्वतंत्रत भारत में अपनी मातृभूमि से भगा दिया गया। | द कश्मीर फाइल्स और कश्मीर जिहाद - [युद्ध का व्यापार](https://test.lifescience-forum.com/war-trade/) - यूक्रेन यूरोप और अमेरिका के झांसे में युद्ध कर बैठा है जिसका खामियाजा भी भुगत रहा है। बड़े वृक्ष के नीचे छोटे पौधे, घास तो पनप सकते हैं, वृक्ष नहीं। | युद्ध का व्यापार - [यूक्रेन](https://test.lifescience-forum.com/ukraine/) - ब्रिटेन एक व्यापारी देश है जिसके नक्शे कदम अमेरिका भी व्यापारी देश बन गया, जब तक उनके व्यापार में लाभ है, वह वही कार्य जारी रखेगें। | यूक्रेन - [स्वयं की सुरक्षा - यूक्रेन संकट](https://test.lifescience-forum.com/self-security-ukraine-crisis/) - यूक्रेन की स्थिति में परिवर्तन तभी आ सकता है जब नाटों के देश मदद करने का नाटक बंद करें और वास्तव में कीव को बचाने के लिए कुछ कड़े कदम उठाएं, फिलहाल इसके आसार कम ही दीखते हैं। | स्वयं की सुरक्षा - यूक्रेन संकट - [चुनावी सोच](https://test.lifescience-forum.com/electoral-thinking/) - चुनाव के समय वादे और दावे बढ़े-चढ़े तो हैं किंतु यही आलम चुनाव दर चुनाव होता है। चुनावी आकांक्षा, महत्वाकांक्षा का विस्तार है। नाम सेवा का, बाकी सब व्यापार है। | चुनावी सोच - [धर्म](https://test.lifescience-forum.com/dharm/) - धर्म का पालन करना एक शिक्षित और सुव्यवस्थित समाज और विकसित भविष्य के लिए परम् आवश्यक है अतः धार्मिक बनिए। | धर्म - [रामेश्वरम और दक्षिण भारत की यात्रा – भाग १](https://test.lifescience-forum.com/rameswaram-and-south-india-part-1/) - यहां की वास्तुकला देखकर सबसे अधिक लज्जा भारत के इतिहास पर आयी जो मुस्लिम स्थापत्य के महिमामंडन से अटे पड़े हैं। जिस प्रकार NCRT आदि में शिक्षा के माध्यम से मुस्लिम शासन का महिमा मंडन किया जाता है, जिसपर प्रश्न पूछने पर इतिहास लिखने वालों के पास कोई साक्ष्य नहीं होते, गहरा षड्यंत्र है। | रामेश्वरम और दक्षिण भारत की यात्रा – भाग १ - [बिकिनी से हिज़ाब फिर जिहाद](https://test.lifescience-forum.com/bikini-to-hijab-then-jihad/) - मुस्लिम समाज कर्नाटक से अलीगढ़ तक जिस तरह से हिज़ाब के लिए लामबंद हो रहा है, उसकी बहुत कड़ी प्रतिक्रिया हिंदू समाज द्वारा होगी। प्रश्न वही कौंधेगा आखिर इसी लिए मुस्लिम को भारत में रोका गया था? बिकनी से हिजाब फिर जिहाद | बिकिनी से हिज़ाब फिर जिहाद - [अहो अहं](https://test.lifescience-forum.com/aho-aham/) - एक भावना होती है साथ जीने की, साथ चलने की, साथ मरने की। अपनी बात कहने की, किसी कंधे पर सिर रख के रोने की या कह सकते हैं पूर्ण होने की। उसे पा जाने की। बिना भावना "भगवान" भी नहीं हो सकते हैं। भावना है इसलिए मानवीय सम्बन्ध है, एक दूसरे से मिलने का अहो अहं - [साम्प्रदायिक दंगे](https://test.lifescience-forum.com/communal-riots/) - विचार करने वाली प्रमुख बात यह है कि बहुसंख्यक हिन्दू यदि साम्प्रदायिक और धार्मिक उन्मादी होता तब कैसे मुस्लिम भारत में रहने को सोचता और उसकी संख्या कैसे बढ़ती? | साम्प्रदायिक दंगे - [आलोचना](https://test.lifescience-forum.com/criticism/) - सहनशीलता कमजोरी नहीं है बल्कि सहनशील वही होता है जिसमें उच्श्रृंखलता नहीं है, यह आपके मानवीय पक्ष की गहराई को दिखाता है, आपनी संवेदना को धार देता है। | आलोचना - [जातियां राजनीतिक बीमा हैं](https://test.lifescience-forum.com/castes-are-political-insurance/) - भारत का संविधान कहता है कि धर्म और जाति के आधार पर विभेद नहीं किया जा सकता है किन्तु राजनीतिक पार्टियों का आलम यह है कि 1932 की जातीय जनगणना से लेकर हर सीट पर जातीय समीकरण बिठा रहे हैं। | जातियां राजनीतिक बीमा हैं - [कांग्रेस का भंडाफोड़](https://test.lifescience-forum.com/congress/) - कांग्रेस और कांग्रेसी नेता तक तो बात ठीक है लेकिन जब यह बात बढ़कर कांग्रेसी वोटर की ओर जाती है तब स्थिति हास्यास्पद बन जाती है। | कांग्रेस का भंडाफोड़ - [चुनावी रस्साकसी](https://test.lifescience-forum.com/chunavi-rassakasi/) - राजनीतिक आपाधापी के बीच आइये पांच राज्यों के चुनाव में सबसे बड़े राजनीतिक सूबे उत्तर प्रदेश की चर्चा करते हैं। कोई पूछ रहा है UP में का बा? दूसरा जबाब दे रहा है UP में सब बा। | चुनावी रस्साकसी - [माँ की सीख](https://test.lifescience-forum.com/ma-ki-seekh/) - अभी कैसे मैं रुक जाऊँ, अभी तो राह अधबर है। सीख माँ की याद आती, लगता मुझको जब भी डर है। माथे पर हाथ रख कर, कुछ यूँ था समझाया। फिकर कैसी भी न करियो, तेरे साथ रघुबर है। (प्रेरक पंक्ति दिनेश रघुवंशी जी की रचित कविता है) | माँ की सीख - [एक नेता अखिलेश यादव](https://test.lifescience-forum.com/a-leader-akhilesh-yadav/) - यह भी हो सकता है कि अखिलेश यादव के कार्यकाल में कुछ कार्य अच्छे भी हुए हों, किन्तु आज तो योगी जी द्वारा कराये गये कार्यों को ही वह अपना बता रहे हैं, जिनका वह पूर्व में फीता काट चुके हैं। | एक नेता अखिलेश यादव - [प्रधानमंत्री के खिलाफ षड़यंत्र](https://test.lifescience-forum.com/conspiracy-against-prime-minister/) - पंजाब में कांग्रेस पार्टी ने जो किया, वह भूल गये कि मोदी सिर्फ एक पार्टी के प्रधानमंत्री नहीं हैं बल्कि पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं। पार्टियां आयेगी-जायेगी यह देश रहना चाहिए। | प्रधानमंत्री के खिलाफ षड़यंत्र - [भयादोहन](https://test.lifescience-forum.com/bhayadohan/) - आज मोहन भागवत यदि कह रहे हैं कि मैं अपना लूटा माल वापस ले रहा हूं तो इसमें गलत क्या है? | भयादोहन - [शरणार्थी, एक समस्या](https://test.lifescience-forum.com/refugees-a-problem/) - मध्यकाल में मुस्लिमों द्वारा जिस तरह से धर्म के नाम पर हिंदुओं का संहार हुआ है, आधुनिक काल में ब्रिटेन ने जिस तरह भारत की लूट की है उसकी भरपाई यहाँ तक कि उस पर चर्चा करने को कोई तैयार नहीं है। | शरणार्थी, एक समस्या - [वर्षांत... गढ़ती छवि](https://test.lifescience-forum.com/sculpted-image/) - नरेंद्र मोदी कैसे गुजरात से भारत के जन और मन नेता बन गये? कांग्रेस ने तो उन्हें राजनीतिक बिरादरी में अछूत घोषित कर रखा था। | वर्षांत... गढ़ती छवि - [ये कैसा न्यू ईयर है?](https://test.lifescience-forum.com/new-year-party/) - भारतीयों का होता सांस्कृतिक पतन जिस गति से बढ़ रहा है, उससे लगता है कि जल्द ही भारत के मुख्य त्यौहार क्रिसमस, न्यू ईयर आदि हो जायेगे। | ये कैसा न्यू ईयर है? - [काशी बोल रहा है](https://test.lifescience-forum.com/kashi-speaking/) - हिन्दू भूत झाड़ने का धर्म नहीं बल्कि स्वयं को जानने का धर्म है। सनातनी उद्घोष करता है 'अहं ब्रह्मस्मि' अर्थात मैं ही ब्रह्म हूँ। ब्रह्म का अर्थ उस परम शक्ति से है और हमारे मध्य किसी पैगम्बर या किसी दूत की जरूरत नहीं है। | काशी बोल रहा है - [माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः](https://test.lifescience-forum.com/mother-earth/) - यह भूमि (पृथ्वी) हमारी माता है और हम सब इसके पुत्र हैं। पर्जन्य अर्थात मेघ हमारे पिता हैं। और ये दोनों मिल कर हमारा पिपर्तु अर्थात पालन करते हैं। यह अथर्ववेद के १२वें कांड, सूक्त १ की १२वीं ऋचा है। | माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः - [दहेज](https://test.lifescience-forum.com/dowry/) - सनातन परंपरा में दायभाग, स्त्रीधन का विधान था किंतु आधुनिक व्यवस्था ने उसे डावरी या दहेज का पर्याय बना दिया है। दहेज समाज का एक ज्वलंत विषय है; फिर भी दहेज का शास्त्रीय पक्ष न लेकर केवल व्यवहारिक पक्ष लिया जाता है। | दहेज - [भारतीय दर्शन की उत्पत्ति](https://test.lifescience-forum.com/origin-of-indian-philosophy/) - भारतीय दर्शन का लक्ष्य केवल ज्ञानप्राप्ति ही नहीं है; अपितु धर्ममीमांसा, आचारमीमांसा भी है। दर्शन की सहायता के बिना उचित-अनुचित, शुभ-अशुभ, अच्छा-बुरा, कर्तव्य-अकर्त्तव्य, श्रेय-अश्रेय का निर्णय नहीं हो सकता। | भारतीय दर्शन की उत्पत्ति - [कृषक कानून और बदहाल किसान](https://test.lifescience-forum.com/agricultural-law-bills/) - उत्तम खेती मध्यम बान, निकृष्ट चाकरी, भीख निदान। कभी उत्तम कही जाने वाली कृषि आज चाकरी वाले से ही भीख मांगने पर मजबूर है उसे उर्वरक की बदहाली से लेकर बीज और बिजली के लिए भी तरसना पड़ता है। | कृषक कानून और बदहाल किसान - [संस्कृति की खोज](https://test.lifescience-forum.com/search-for-culture/) - आज के आधुनिक युग में विश्व के हर कोने से लोग भारत के धर्म और संस्कृति में रुचि ले रहे हैं। अभी हाल ही में इस दीपावली पर अमेरिका पहले से भी ज्यादा सेलिब्रेट करने के साथ इसकी प्रशंसा करता दिखाई पड़ा।| संस्कृति की खोज - [राधा](https://test.lifescience-forum.com/radha/) - राधे राधे राधे राधे, राधे राधे कृष्ण राधे, राधा कृष्ण ते हु जादा देत सुनाई है। यूं तो रानी सोलह, हजार एक सौ आठ, फिरहु कान्हा बंसी राधा संग ही बजाई है। प्रेम की नीत तुम सीखियों वा राधिका ते, प्रीत की रीत दूर रह के निभाई है। होगी रानी महारानी, महलों की रुक्मणी, राधा राधा - [बचपन की साइकिल](https://test.lifescience-forum.com/bicycle/) - लोभ और लालच जवानी का सत्यानाश कर दे रही है। ऐसा लगता है कि क्या लोगे.. मेरा बचपन लौटने के लिये? लगता है कि काश एक बार फिर बचपन मिल जाता.... मैं बच्चा बन जाता। | बचपन की साइकिल - [सनातन धर्म में ग्रन्थों को लिखने-पढ़ने का क्या प्रयोजन है?](https://test.lifescience-forum.com/purpose-of-reading-n-writing-scriptures-in-sanatan-dharma/) - अर्थ यह हुआ कि सभी वेदादि शास्त्रों को लिखने/पढ़ने का प्रयोजन धर्म, अर्थ, काम का पालन करते हुए अंततः परमात्मतत्व अर्थात मोक्ष की प्राप्ति है। | सनातन धर्म में ग्रन्थों को लिखने-पढ़ने का क्या प्रयोजन है? - [सवर्णों का अंक गणित](https://test.lifescience-forum.com/caste-politics/) - इस लेख के माध्यम से सवर्ण जातियों के यह अंकगणित समझाने का अर्थ यह है कि सामान्य/ सवर्ण/ फॉरवर्ड/ अपर क्लास के लोग इस खेल को समझें और आपस में न बंटे। | सवर्णों का अंक गणित - [भय की श्रद्धा](https://test.lifescience-forum.com/fear-of-faith/) - बार-बार हिन्दू श्रद्धा का मजाक इस लिए उड़ाया जा रहा है क्योंकि उन्हें भय नहीं है दंडित होने का। | भय की श्रद्धा - [मजहब बैर सिखाता है](https://test.lifescience-forum.com/religion-teaches-hatred/) - फ्रांस में कार्टून की घटना, कश्मीर का हजरतबल, मन्दिर का विवाद। अब गौर करने वाली बात है कि मुस्लिम कब हिन्दू के साथ मिल कर रहा है? यदि उसे मिलकर रहना ही आता तो भारत में हिन्दू - मुस्लिम दंगे का इतिहास नहीं रहता। | मजहब बैर सिखाता है - [माँ से प्रार्थना](https://test.lifescience-forum.com/maa-se-prarthna/) - माँ बल देवे बुद्धि देवे, विचारों की शुद्धि देवे देवे धन धान मैया मेरे आंगने में | घर में प्यार देवे, खुशियां अपार देवे खेलें नन्द लाल मैया मेरे आंगने में || माँ से प्रार्थना - [अथातो शक्तिजिज्ञासा](https://test.lifescience-forum.com/shakti-jigyasa/) - यह परा शक्ति परमशिवाश्रया है। इसे दर्शन शास्त्रों में ‘ब्रह्मश्रया माया’ भी कहा गया है। यही परा शक्ति जिज्ञासा, इच्छा-ज्ञान-क्रियात्मक होने के कारण ‘त्रिपुरा’ आदि उपरोक्त नाम से जानी जाती है। | अथातो शक्तिजिज्ञासा - [धर्म](https://test.lifescience-forum.com/dharma/) - भारत और भारत की संस्कृति बड़ी अद्भुत है। देश बड़ा है फिर भी धार्मिक एकरूपता है। पितरों के लिए चारों वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शुद्र की एक ही मान्यता है। | धर्म - [सोच रहा हूं किसपर लिखूं](https://test.lifescience-forum.com/what-to-write-on/) - 5 बीघे खेती करने वाला, जिसके भूमि का मूल्य ही लगभग 1 करोड़ है, वह अपनी बिटिया का विवाह खेती से क्यों नहीं कर पाता? | सोच रहा हूं किसपर लिखूं - [चौसठ योगिनी माता कौन हैं?](https://test.lifescience-forum.com/chausath-yogini-temple/) - प्राचीन समय में भारत में चौसठ योगिनी माता के मंदिर बनते थे। चौसठ योगिनी माता आद्य शक्ति काली का अंश हैं जो मुरा नामक राक्षस का वध करने के लिए माता ने अवतार लिया था। - [पुलिस का रौब](https://test.lifescience-forum.com/police/) - मनीष गुप्ता मर्डर में शामिल जगत सिंह जैसे पुलिसवालों का एकबार ही सही एनकाउंटर हो जाये तो समझिये इसकी गूंज लंबी चौड़ी होगी। जब बिकरु कांड में विकास दुबे का एनकाउंटर हो सकता है तो पुलिस को अपने रवैये पर कायम रहना चाहिए। | पुलिस का रौब - [वेदाध्ययन से पूर्व जानने योग्य बातें](https://test.lifescience-forum.com/things-to-know-before-studying-vedas/) - जो मनुष्य ऋषि, छन्द, देवता और विनियोग को जाने बिना वेद का अध्ययन, अध्यापन, जप, हवन, यजन, याजन आदि करते हैं उनका वेदाध्ययन निष्फल तथा दोषयुक्त होता है। | वेदाध्ययन से पूर्व जानने योग्य बातें - [कल की कांग्रेस और आज की कांग्रेस](https://test.lifescience-forum.com/todays-congress/) - देश कि एक पुरानी पार्टी अपने पुराने मूल्यों भूलकर बिना मुद्दे के चुनाव में जा रही है। लगातार मिलते हार से सबक कम लेकिन प्रतिरोध की भावना ज्यादा विकसित कर रही है। | कल की कांग्रेस और आज की कांग्रेस - [विवाह](https://test.lifescience-forum.com/marriage/) - वास्तविकता यह है कि ब्राह्मणों ने समाज को चलाने के लिए सामाजिक ताने-बाने से लिप्त जो नियम दिया था, वही समाज और परिवार को जोड़ने में सार्थक सिद्ध हुआ है। विवाह| - [सेकुलर और अफगान जलेबी](https://test.lifescience-forum.com/secular-and-afghan/) - धर्म के मर्म को न समझने वाले हिंदुओं को जानना चाहिए कि पूरे विश्व में हुए आज तक के युद्ध के पीछे धर्म ही रहा है। सिर्फ सनातन धर्म के लोग ही अन्य लोगों को सताने को पाप कहते हैं। | सेकुलर और अफगान जलेबी - [भारत की कमजोरी](https://test.lifescience-forum.com/indias-weakness/) - भारत अपनी आंतरिक राजनीति में ही अधिक उलझा रहा है जैसे पड़ोस में कुछ हो ही न रहा हो। मुफ्त के अनाज की बंदरबाट, ओबीसी आरक्षण विधेयक और हिंदु-मुस्लिम के पागल प्रेम प्रलाप में अभियान जारी है। | भारत की कमजोरी - [संत और कुँवारी मां](https://test.lifescience-forum.com/saint-and-mother/) - ईश्वर ने आप को विवेक दिया है, उसका प्रयोग करिये। भावना में किसी को अच्छा या बुरा न बनाइये। गुरु सदा जानकर ही बनाइये, स्वार्थ की पतंग न उड़ाइए। | संत और कुँवारी मां - [मोबाइल ने क्या छीना?](https://test.lifescience-forum.com/disadvantage-of-mobile/) - मोबाइल फोन का लाभ निश्चित रूप से है लेकिन इसका सही प्रयोग न होने से प्रयोगकर्ता को नुकसान ही अधिक हो रहा है। लोग एक दूसरे से बहुत बात करते थे वह मोबाइल के दौर में थम सा गया है। | मोबाइल ने क्या छीना? - [कर्षते इति कृष्ण:](https://test.lifescience-forum.com/krishanjanamashtmi/) - मन को आकर्षित करने वाले भगवान श्रीकृष्ण का धराधाम पर आज के ही दिन 27वें द्वापर के रोहिणी नक्षत्र, भाद्रपद माह की कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को रात्रि 12 बजे आविर्भाव हुआ। | कर्षते इति कृष्ण: - [मेरे राम, तेरे राम](https://test.lifescience-forum.com/mere-ram-tere-ram/) - विवेकानंद जी ने राम के बारे में शिकागो में कहा था कि जब तक भारत में एक पुरुष और एक महिला भी जीवित है, तब तक राम और सीता जीवित हैं। सीता-राम सदैव से सनातनियों के आदर्श रहे हैं और रहेंगे। | मेरे राम, तेरे राम - [रक्षाबंधन](https://test.lifescience-forum.com/raksha-bandhan/) - माता लक्ष्मी सबसे पहले भगवान वामन की ओर संकेत करते हुए कहा कि ये मेरे स्वामी हैं, इन्हें अपने प्रेम के बंधन से मुक्त करिये। राजा बलि ने बहन की इच्छा पूर्ण की। यहीं से भारतीय संस्कृति में रक्षाबंधन की शुरुआत हुई। | रक्षाबंधन - [अफगानिस्तान और भारत की नीतियां](https://test.lifescience-forum.com/afghanistan-and-indias-policies/) - पानीपत के तृतीय युद्ध 1761 में जब मराठों की भारत के किसी राजाओं ने मदद नहीं की तो उनके कैम्प में रसद नहीं पहुँची, सैनिक भूखों मरने लगे, उन्होंने सदाशिव राव से कहा श्रीमंत हमें भूख से न मरने दें, हम युद्ध में मरना चाहते हैं। | अफगानिस्तान और भारत की नीतियां - [हनुमत प्रार्थना](https://test.lifescience-forum.com/hanumat-prayer/) - तेरो ये दास बाबा सरन तिहारी है। संकट दूर करो कृपा भरपूर करो, रखियों चरण बाबा अरज ये भारी है। बजरंग बली मेरे मैंने भरोसे तेरे, अपनी ये नाव भंवर उतारी है। एक हाथ मझदार दूजे हाथ पतवार, ऐसे ही सँवारो जैसे अब तक सँवारी है। सियावर रामचंद्र की जय पवनसुत हनुमान की जय *** हनुमत प्रार्थना - [भारत में ओलंपिक के आयोजन](https://test.lifescience-forum.com/olympic-events-in-india/) - मुख्य रूप से पांच तरह के खिलाड़ी और दर्शक भाग ले रहे हैं जनरल, ओबीसी, SC, ST और अल्पसंख्यक। यहाँ यह स्पष्ट किया जाता है कि अल्पसंख्यक का मतलब 'धर्म विशेष' ही होता है। | भारत में ओलंपिक के आयोजन - [बेबस अफगानी और उनकी औरतें](https://test.lifescience-forum.com/helpless-afghanis/) - अमेरिका ने अफगानिस्तान में जो धोखे का खेल खेला है, उसे पूरे विश्व ने देखा। कैसे 20 साल से प्रशिक्षित 20 लाख की अफगानी सेना अमेरिका के जाने पर पांच दिन भी प्रतिरोध नहीं कर पायी और 90 हजार तालिबानियों के आगे सरेंडर कर दिया। | बेबस अफगानी और उनकी औरतें - [अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा](https://test.lifescience-forum.com/taliban-capture-afghanistan/) - एशिया सदा से अमेरिका, रूस और यूरोपीय देशों की प्रयोग स्थली रही है। अस्थिर एशिया ही हथियारों और सैनिक साजो सामान की खरीद - फरोख्त करेगा। | अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा - [दरकते गाँव बहकते लोग](https://test.lifescience-forum.com/दरकते-गाँव-बहकते-लोग/) - ब रह गया आँसू का असमान लोग भी अब हो रहे शैतान शायद अब न रहे ये जहाँन। फिर भी भारत तो हो ही रहा महान गांव का चाहे न रहे निशान… - [विलुप्त होते भारतीय त्यौहार](https://test.lifescience-forum.com/indian-festivals/) - अब हमारे यह स्थानीय पर्व धीरे - धीरे टीवी, सोसल मीडिया और आधुनिकता की चकाचौंध में गायब होते जा रहे हैं। पहले छोटे उत्सवों जिन पर पूरा गांव इकट्ठा हो जाता था अब नये ज़माने में ऐसा कोई त्यौहार नहीं जिस पर पूरा गांव इकट्ठा हो सके। | विलुप्त होते भारतीय त्यौहार - [हे री सखी..](https://test.lifescience-forum.com/re-sakhi/) - हम दोनों तो उस मानसरोवर के हंस की तरह हैं जिसे लौटकर वहीं जाना है जहाँ से आया है। यदि प्रेम ईश्वर है तो हम जरूर एक होंगे। तुम आना मेरे इंतजार का कोई समय सीमा नहीं है बस तुम हो। - [आपकी सोच को कौन नियंत्रित करता है](https://test.lifescience-forum.com/who-controls-your-thinking/) - अध्ययन, श्रवण, चिंतन, मनन, निदिध्यासन करिये। बुद्धि की स्वतंत्रता के लिए दर्शन भी कहता है। प्रश्न चिन्ह आप पर है कि क्यों इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया? | आपकी सोच को कौन नियंत्रित करता है - [पत्रकार दानिश के मारे जाने का कारण](https://test.lifescience-forum.com/reason-for-the-death-of-journalist-danish/) - पत्रकार दानिश सिद्दीकी को अफगानिस्तान में तालिबान ने जिस तरह से मारा है उससे स्पष्ट पता चलता है कि इस्लाम में बोलने की आजादी नहीं है। दानिश से गलती यह हुई कि उसने अफगानिस्तान को भारत और तालिबानियों को हिन्दू समझने की भूल कर बैठा। | पत्रकार दानिश के मारे जाने का कारण - [भारत के पड़ोसी देश](https://test.lifescience-forum.com/neighboring-countries-of-india/) - भारत की स्थिति विश्व अखाड़े में उस पहलवान की तरह है जो लगोंट बार - बार टाइट तो करता है किंतु अखाड़े में नहीं उतरता। चीन जीते या अमेरिका इससे भारत की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होगा। क्योंकि वह आखड़े में उतरा ही नहीं भारत के पड़ोसी देश। | - [नारी का महत्व](https://test.lifescience-forum.com/importance-of-women/) - नारी शास्त्र, नारी पुराण, नैतिकता और चरित्र की बात बिना नारी के किससे करेंगे? एक बात जानते हैं कि पुरुष को सर्वाधिक प्रेम उसकी माँ करती है तो वहीं नारी को उसका पति। | नारी का महत्व - [हिंदुत्व कैसे आए..?](https://test.lifescience-forum.com/hindutwa-kaise-aaye/) - वेद कौन - कौन से हैं? उपनिषद क्या होता है? महाभारत कैसा होता है? हमें पता नहीं है लेकिन हम हिंदुत्व की रक्षा करेंगे.... हे चतुर मानव! करोगे कैसे? | हिंदुत्व कैसे आए..? - [कांग्रेस से ज्यादा व्यथित कांग्रेसी हैं](https://test.lifescience-forum.com/congresi-is-more-upset-than-congress/) - राजीव को इंदिरा की शहादत की सहानभूति मिली किन्तु धार्मिक नसमझी, स्वयं की पत्नी और काँग्रेसियों की महत्वाकांक्षा ने उन्हें असमय ही लील लिया। इस राजनीति का फायदा दो लोगों को हुआ, सहानभूति ने मैडम सोनिया गांधी को बनाया और गलतियों ने BJP को। | कांग्रेस से ज्यादा व्यथित कांग्रेसी हैं - [भारत की लूट](https://test.lifescience-forum.com/bharat-ki-loot/) - बंगाल और बिहार की निलहे की दशा का वर्णन एक अंग्रेज करता है कि "वह खा न सकें इस लिए नील की खेती कराई जा रही है।" | भारत की लूट - [सांस्कृतिक मूल्य और नारी](https://test.lifescience-forum.com/cultural-values-and-women/) - भारत, सांस्कृतिक परम्पराओं और मूल्यों का निर्वहन करने वाला देश है। विश्व में भारत की विशेष पहचान है। भारत विश्व में विशिष्ट विशेषताओं यथा सहनशीलता, उदारता, अतिथि सेवा की विशेष परम्परा के कारण प्रसिद्ध है। | सांस्कृतिक मूल्य और नारी - [अन्धानुकरण](https://test.lifescience-forum.com/blind-imitation/) - कहा जाता है किसी से कुछ सीखना है तो ज्ञान सीख लीजिये, अच्छाई सीख लीजिये। लेकिन आप तो पश्चिम से फ़टी जीन्स, तंग कपड़े, आड़े तिरछे बाल सवांरना और शराब की पार्टी सीख रहे हैं सीखना ही है तो उनसे विज्ञान, मेहनत, कर्मठता, देश के प्रति प्रेम और कर्तव्य क्यों नहीं सीखते? | अन्धानुकरण - [आयुर्वेद vs एलोपैथी](https://test.lifescience-forum.com/ayurveda-vs-allopathy/) - मगध साम्राज्य में ईसा पूर्व छठी शताब्दी में जीवक नामक राजवैद्य थे जिनकी शिक्षा तक्षशिला में हुई थी उन्होंने मगध के सेनापति के कटे पैर की जगह लोहे का पैर लगा दिया। जिससे उन्होंने आगे के युद्ध में भाग लेने के साथ अपना सामान्य जीवन जीया। | आयुर्वेद vs एलोपैथी - [कलयुग की प्रेमगाथा](https://test.lifescience-forum.com/love-story-of-kaliyug/) - प्रेमी - प्रेमिका और पति - पत्नियों की अदला - बदली अमेरिकी - यूरो संस्कृति के प्रभाव से रिश्तों में पशुता आ जा रही है। माया नगरी के सिने-कलाकार की तरह मेरी बीबी सिर्फ मेरी नहीं है, वह तब तक ही है जब तक वह चाहे। | कलयुग की प्रेमगाथा - [गांव चला शहर बनने](https://test.lifescience-forum.com/village-city/) - समय के साथ खोते गांव बसते शहर, टूटते रिश्ते, बढ़ता अहंकार, गायब होती मनुष्यता, उपकरणों का गुलाम होता मानव धीरे - धीरे मशीन बनने की ओर कदम बढ़ा दिया है। | गांव चला शहर बनने - [स्त्री चरित्र](https://test.lifescience-forum.com/female-character/) - भारत की माँ जिस दिन ठान लेगी कि उसे सनातन संस्कृति को जिंदा करना है, वह उसे जिंदा कर देगी। पुरुष तो भगीरथ प्रयास वर्षों से कर रहा है लेकिन स्थिति वही 'ढाक के तीन पात' वाली है। | स्त्री चरित्र - [भारत की संस्कृति क्या है?](https://test.lifescience-forum.com/what-is-the-culture-of-india/) - मनुष्य धरती पर सिर्फ खाने और मरने ही आता है, यह सनातन परम्परा के चिन्तन में है ही नहीं। वर्ण व्यवस्था के माध्यम से व्यक्ति के जन्म के साथ ही उसके जीवन निर्वाह के लिए रोजगार का सृजन हुआ जिससे जन्म लेने वाले को ४० साल तक रोजगार की खोज में अपनी ऊर्जा न गवानी पड़े, कितनी अद्भुत व्यवस्था थी। | भारत की संस्कृति क्या है? - [एक जरूरी माँग! अभी तक जहाँ किसी की नजर नहीं गई है। इसके लिए ज्यादा उम्मीद है कि मीडिया वाले दोषी हों। भारत के अस्मिता का सवाल है।](https://test.lifescience-forum.com/an-urgent-demand/) - एक जरूरी माँग! अभी तक जहाँ किसी की नजर नहीं गई है। इसके लिए ज्यादा उम्मीद है कि मीडिया वाले दोषी हों। भारत के अस्मिता का सवाल है। - [प्रकृति की पीड़ा - कोरोना](https://test.lifescience-forum.com/natures-torment-corona/) - मानव विकास के वादे के साथ शुरू हुआ भौतिक विकास वास्तव में विनाश है जो प्राकृतिक असुंतलन पैदा करके नये - नये वायरस की संभावनाएं पैदा कर रहा है। प्रकृति में संतुलन का नाम जीवन है और असुंतलन का नाम भयावह मृत्यु। | प्रकृति की पीड़ा - कोरोना - [साम्प्रदायिक गांधी](https://test.lifescience-forum.com/communal-gandhi/) - साम्प्रदायिक राजनीति की शुरुआत भारत में गांधी जी द्वारा शुरू की गयी थी। उन्होंने मोपला विद्रोह का समर्थन किया, जहां हिन्दू जमीदारों और हिन्दू नागरिकों को मारा जा रहा था। सबसे बढ़कर खिलाफत आंदोलन जिसका भारतीय राजनीति से कोई मतलब नहीं था, गांधी जी ने मुसलमानों का भी नेता बनने के लिए धार्मिक राजनीति के समर्थन के साथ - साथ उसमें सक्रिय भूमिका भी निभाई। | साम्प्रदायिक गांधी - [कोरोना की कराह](https://test.lifescience-forum.com/corona-second-wave/) - दो गज दूरी, मास्क जरूरी में ढ़िलाई से कह रहे लोगों में नई कोरोना स्ट्रेन का विस्फोट हो रहा है। जैसे - जैसे टेस्ट बढ़ेगा मरीजों की संख्या में और भी वृद्धि होने का अनुमान है। | कोरोना की कराह - [उपासना स्थल अधिनियम 1991 और कांग्रेस](https://test.lifescience-forum.com/places-of-worship-act-1991/) - 1992 इस्वी में केंद्र में नरसिंहा राव की सरकार ने अयोध्या विवाद के आलोक में उपासना स्थल अधिनियम पास किया। इस अधिनियम के तहत हिंदू धर्म स्थलों पर मुस्लिम कब्जे को संवैधानिक मान्यता दी गयी। | उपासना स्थल अधिनियम 1991 और कांग्रेस - [नैरेटिव का महत्व](https://test.lifescience-forum.com/importance-of-narrative/) - भारत में एजेडावादी लोग बहुत प्राचीन समय से रहे हैं। उनका एक ही ध्येय रहा है कि कैसे भी करके सत्ता मिल जाये। दलित, अल्प संख्यक, पिछड़ा, आरक्षण उसी के हथकंडे हैं। लोकतंत्र खत्म कर दीजिए यह एजेंडे स्वयं समाप्त जायेंगे। | नैरेटिव का महत्व - [पश्चिम बंगाल में किसकी सरकार?](https://test.lifescience-forum.com/election-in-west-bengal/) - पश्चिम बंगाल में किसकी सरकार? किसकी सरकार, कितने सीटों से और क्यों बनेगा? पूरा विश्लेषण | पश्चिम बंगाल में किसकी सरकार? - [स्त्री को नारी कहूँ](https://test.lifescience-forum.com/woman-and-feminism/) - कुछ बंधन जो आज हमें प्रतीत होते हैं, वास्तव में नहीं हैं, वह बंधन भी समाज को बांधे रखने का कारण हैं। वास्तविकता यही है कि हमारी संस्कृति माँ के इर्द - गिर्द घूमती है। | स्त्री को नारी कहूँ - [श्रीराम मंदिर समर्पण निधि](https://test.lifescience-forum.com/shriram-mandir/) - भारत में मन्दिर समर्पण निधि को जो चन्दा कह रहे हैं, वह गर्त में जायेंगे। राजनीति में तुष्टिकरण अब सत्ताजीविता नहीं हो सकती है। सोई हुई कौम में श्रीराम मंदिर जागृति लेकर आयेगा। | श्रीराम मंदिर समर्पण निधि - [सिमटती कांग्रेस](https://test.lifescience-forum.com/losing-congress/) - केंद्र से लेकर राज्यों के चुनाव में कांग्रेस का ग्राफ लगातार गिर रहा है। ऐसा क्या हो गया जो कांग्रेस को पतन की ओर ले जा रहा है? क्या कांग्रेस की जो नीतियां अभी तक लाभदायक थीं, वही उसके पतन में सहायक बन गयी हैं? | सिमटती कांग्रेस - [भारत का इतिहास](https://test.lifescience-forum.com/history-of-india/) - अंग्रेजों के साथ एक समस्या है कि उनका पूरा विकास ईसा के बाद हुआ है और इसी चश्मे से वह विश्व को उलट - पलट कर देखता और वर्णित करता है। | भारत का इतिहास - [सत्ता संघर्ष बनाम भारत](https://test.lifescience-forum.com/power-struggle-vs-india/) - भारत को कोई मुगल, अफगान, तुर्क या अंग्रेज कभी गुलाम नहीं बना सकता था, जब तक यहीं के लोग आस्तीन के सांप न बनते, यही आज के राजनीतिक परिदृश्य में भी देखा जा सकता है। | सत्ता संघर्ष बनाम भारत - [प्रेम की फैशनपरस्ती और असलियत](https://test.lifescience-forum.com/loves-fashionism-and-reality/) - प्रेम, समर्पण का नाम है जिसमें किसी प्रकार की वासना समाहित नहीं है वह निर्मूल और पूर्ण है। प्रेम को तुम जितना शब्दों में बांधना चाहते हो वह शब्दों से मुखरित होकर मन की गलियों में गुंजायमान होने लगता है। | प्रेम की फैशनपरस्ती और असलियत - [आंदोलन का लब्बोलुआब](https://test.lifescience-forum.com/bottom-line-of-the-movement/) - भारत में पिछले कुछ आंदोलनों से यह बात सामने आती है कि इसमें आंदोलन से ज्यादा राजनीतिक विचारधारा का विरोध होता है, जिसके पीछे राजनीतिक एजेंडा और राजनीतिक पार्टियां कार्य करती हैं। | आंदोलन का लब्बोलुआब - [चूक](https://test.lifescience-forum.com/chook/) - आंदोलन के नाम पर दिल्ली को कब तक बंधक बनाया जाता रहेगा? दिल्ली के लोगों के मानवाधिकार की सुरक्षा कौन करेगा? दिल्ली में पिछले एक साल से हुये सरकार विरोधी प्रदर्शनों नें लोकल लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। | चूक - [विचारों में विचार घुसेड़ने का षड़यंत्र](https://test.lifescience-forum.com/thoughts-in-thoughts/) - इतिहास की साम्राज्यवादी, मार्क्सवादी लेखन ने मूल इतिहास को ही गायब कर दिया। सामाजिक और शैक्षिक स्तर पर सेक्युलर वामपंथी विचार ने समाज को ही बाजार बना दिया। लोग अपना हित देख मौन मनमोहन बन गये। विचारों में विचार घुसेड़ने का षड़यंत्र - [किसका नववर्ष](https://test.lifescience-forum.com/whose-new-year/) - दोष अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था से ज्यादा हमारा स्वयं का है जो अपने सनातनी संस्कार, सनातन धर्म को भूल कर खिचड़ी सेकुलिरिज्म में फँस गया है। कैलेंडर की जगह कब संस्कृति बदल दी पता ही नहीं चला। हमें अपने मूल को जानना होगा जिसके जानने में ही विश्व का कल्याण छुपा है। किसका नववर्ष - [पहले की बारात Vs अब की बारात](https://test.lifescience-forum.com/indian-marriage-ceremony/) - विवाह सनातन धर्म के 16 संस्कारों में सबसे महत्वपूर्ण संस्कार है जिसमें दो ईकाई एक हो जाते हैं। सृष्टि के सृजन का यज्ञ प्रारम्भ होता है, एक नये का जन्म होता है। बारात का कौतूहल तो हमें शिव - पार्वती के विवाह में रामचरित मानस में भी दिखता है। गोस्वामी बाबा ने क्या रोचक वर्णन किया है। - [इतिहास में नैरेटिव कारोबार](https://test.lifescience-forum.com/narrative-business-in-history/) - अब आप कहेंगे कि धनंजय आप सही नहीं कह रहे हो, आपको सिंधिया परिवार, जयपुर नरेश और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के वंशजों को देखना चाहिए। दो बड़े परिवार जो हाईब्रिड होकर एक हो गये वह सत्ता पर जोंक की तरह चिपक गये हैं। लोकतंत्र को परिवारिक राजतंत्र बना दिया है। - [कृषि शास्त्र और किसान पुराण](https://test.lifescience-forum.com/krishi-shastra/) - यही कृषि क्षेत्र है जब 2008 की आर्थिक मंदी विश्व पर छायी तब यह रीढ़ बन कर भारतीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करके विश्व का ध्यान भारत की ओर आकर्षित करने का कार्य किया था फिर आज भी किसानों के विषय को कैसे भूल जाते हैं? - [परिवार-टूटते रिश्ते](https://test.lifescience-forum.com/family-relationships/) - भारतीय समाज में भाई के रिश्ते को बहुत मजबूत माना जाता है। किंतु इस समय सबसे बड़ा टकराव भाई का भाई से है। क्या आपने विचार किया है कि इतने माधुर्य लिए बन्धु के सम्बंध में आज इतनी कडुआहट कैसे पैदा हो गयी? - [दीपावली का दिन](https://test.lifescience-forum.com/diwali-day/) - एक बार विवेकानंद जी मिलने एक मुस्लिम आया। उसने कहा महाराज जी मेरा कल्याण कैसे होगा मैं तो मुस्लिम हूँ। जानते हैं स्वामी जी ने क्या कहा... तुम जिसकी भी इबादत करते हो उसका फर्क नहीं पड़ता है, तुम दृढ़ रहो, सत्य का अनुसरण करो। धर्म का आडम्बर न करो बल्कि अनुशीलन करो। स्वयं को जानो....कल्याण ही होगा। - [विचारों का विचार](https://test.lifescience-forum.com/विचारों-का-विचार/) - किसी को कत्ल करने की इजाजत यदि कोई धर्म देता है तो यकीन मानिये वह धर्म नहीं है। वह कौम ही हो सकता है। मुस्लिमों की तादाद बढ़ाने के लिए एक हथकंडा यह भी है कि गैर-मुस्लिम लड़की को प्रेमजाल में फंसा कर एक नया मुसलमान बना लो। - [अंग्रेज भारत का उद्धारक कैसे बन गया?](https://test.lifescience-forum.com/british-become-the-savior-of-india/) - हमारे समाज में गांव, गरीब, किसान, माता-पिता की परेशानी से ज्यादा लोगों के स्वयं हित केंद्र में है। सारी विचारधारा देहात्मवाद की ओर घूम गयी है, सुख का मूल शरीर तक सीमित होता जा रहा हैं। - [बामी बकासुर](https://test.lifescience-forum.com/wampanth/) - भारत में वामपंथी होने का मतलब अभी कुछ वर्ष तक उच्च बौद्धिकता का परिचायक था। अब का तो न कहिये किसी बामपंथी से बात करिये तो वह गालीगलौज पर उतर जाता है। तर्क का जबाब कुतर्क करके देता है। - [ओह! यह क्या हो गया कोरोना](https://test.lifescience-forum.com/oh-corona/) - कोरोना खत्म हो जाए सब की आशा है, वह लोग दुष्टता नहीं करेंगे ये हमारा वादा है ll - [हे कृष्ण! हे माधव!](https://test.lifescience-forum.com/he_krishna/) - हे कृष्ण! एक दिन वह समय आप ही लायेंगे जब विश्व सनातन झंडे के नीचे एकत्र होगा और आंनदित भी। धर्म से भटके लोगों के लिए यही सबसे बड़ा पश्चाताप होगा। - [श्री राम मंदिर और अयोध्या](https://test.lifescience-forum.com/shri-ram-temple-and-ayodhya/) - रामलला का मंदिर सिर्फ एक मंदिर ही नहीं है वरन यह हिन्दु स्वाभिमान, भारत के पहचान, भारत के आदर्शों का स्थान है। हिन्दू 5 अगस्त 2020 के बाद एक दूसरे तरह के विश्व में नजर आयेगा। - [श्रीराम मंदिर और बाबरी विवाद](https://test.lifescience-forum.com/shriram-temple-and-babri-dispute/) - धर्म की गुणा - गणित की राजनीति अभी चालू है। बाबरी ढांचे के इतिहास की धूल लिए कभी शौचालय, धर्मशाला तो कभी हॉस्पिटल और स्कूल के हिमायती आज मंदिर - विचार के इर्द गिर्द जमा हो रहे हैं। - [बूढ़ी कांग्रेस की बूढ़ी सोच](https://test.lifescience-forum.com/thinking-of-old-congress/) - कांग्रेस पार्टी का एक समृद्धिशाली इतिहास रहा है किन्तु आज की परिस्थितियों में उसके वयोवृद्ध नेताओं की कसरत ने उसे नेतृत्व विहीन बना दिया है। - [संस्कृति की खोज](https://test.lifescience-forum.com/discovery-of-indian-culture/) - कौन कहे वेद, शास्त्र, गीता, रामायण पढ़ने को? कौन गीत गुनगुनाये महान भारत के जिसने विश्व को मानवता की पहचान करवायी? काले अंग्रेजों ने हमें पढ़ा दिया कि "भारत की खोज" वास्कोडिगामा ने की थी। अब जब तक हम भारत को अपने में नहीं खोज लेते तब तक भारत विश्व गुरु कैसे बन सकता है...? - [सांस्कृतिक स्कंधावार और खोया भारत](https://test.lifescience-forum.com/cultural-wings-and-lost-india/) - एक समय पूरी धरती भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत थी। जब तक शासन और नीतियां सनातनी परम्परा से चलती और बनती रहीं तब तक विश्व के कोने - कोने में भारतीय संस्कृति फली फूली। - [नवबौद्ध कितने बौद्ध](https://test.lifescience-forum.com/buddhists-and-neo-buddhists/) - भारत की गुलामी और इन सभी समस्याओं का कारण अंग्रेजों को न मान अंग्रेजों की दी परिभाषा जातिवाद, दलित, सामंतवाद, ब्राह्मणवाद का कल्पित सिद्धांत गढ़ कर सभी समस्या के लिए मनुस्मृति और ब्राह्मण को ठहरा दिया। - [नवबौद्ध और वामपंथ](https://test.lifescience-forum.com/new-buddhist-and-leftist/) - भारत की आर्थिक समस्या को धार्मिक रंग दिया गया। आज सभी नौकरी करना चाहते हैं, आखिर क्यूँ ? यह तो शुद्र वृत्ति ही है। आज नौकरी आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है, इस लिए सब नौकर बनना चाहते हैं। - [शाकाहार ही क्यूँ?](https://test.lifescience-forum.com/why-vegetarianism/) - पैसे का मोल 84 लाख योनियों में केवल मनुष्य के लिए ही है क्योंकि वह अपनों को ठगता है और अपना का स्वार्थ सिद्ध करना चाहता है। इसी लिए मुद्रा है क्यों कि आदमी पल - पल बदलता है। - [5 ट्रिलियन इकोनॉमी : सपना या हकीकत](https://test.lifescience-forum.com/5-trillion-economy-dream-or-reality/) - 2019 में भारत की जीडीपी 2.7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर थी उससे पूर्व 2014 में 1.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर थी। अर्थात मोदी सरकार 1.0 में देश की जीडीपी में 1.8 ट्रिलियन से बढ़कर 2.7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी। - [चीन से रिश्ते में कैसी आयी कडुवाहट](https://test.lifescience-forum.com/relationship-with-china/) - चीन भारत को 1962 वाला ही मानने की भूल बार - बार कर रहा है। भारत चीन युद्ध होता है तो इसकी चिंगारी को विश्वयुद्ध बनने में देर न लगेगी। क्योकि युद्ध की आड़ में बहुत से देशों के एक - दूसरे से हिसाब करना बाकी है। - [बौद्ध बनाम नवबौद्ध](https://test.lifescience-forum.com/buddhist-vs-new-buddhist/) - "धम्मं शरणं गच्छामि" की जगह "जय भीम" हो गया अपने को राजनीतिक शुर्ख करने के लिए जय भीम के साथ ही "जय मीम" भी हो गया। - [विनाश का विकास कोरोना की जुबानी](https://test.lifescience-forum.com/development-of-destruction-by-corona/) - पूरे प्रकृति का स्वामी मनुष्य को मानने की गलती न करिये। "प्रकृति" एक संतुलन का नाम है। एक चींटी भी प्राकृतिक संतुलन स्थापित करने में सहयोग करती है। - [कोरोना योद्धा](https://test.lifescience-forum.com/corona-fighters/) - जिनके ह्रदय दया करुणा से भरे रहते हैं, जिनके भाव विशुद्ध सेवा भाव से परिपूर्ण रहते हैं, जो रोगी की सेवा में लीन कर्तव्यनिष्ठ सजग प्रहरी समान हों, उन कर्म वीरों को मेरा शत शत नमन अभिनन्दन है । - [श्री नृसिंह प्राकट्योत्सव “नृसिंह चतुर्दशी”](https://test.lifescience-forum.com/shri-narsingh-chaturdashi/) - श्री नृसिंह जयंती, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार नृसिंह भगवान विष्णु के अवतार हैं। नृसिंह अवतार लेकर भगवान विष्णु ने दैत्यों के राजा और महाशक्तिशाली हिरण्यकशिपु का वध किया था। - [रक्तरंजित साम्यवाद एक धूर्त विचार](https://test.lifescience-forum.com/communism-a-sly-idea/) - लोकतांत्रिक प्रणाली में जबरदस्त हिंसक घटनाओं का सहारा लिया जाता है। इसका ज्वलंत उदाहरण पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और केरल रहे हैं जहां चुनाव के समय व्यापक हिंसा देखने को मिलती है। - [श्री जानकी नवमी 2 मई 2020](https://test.lifescience-forum.com/shri-janaki-navami-2-may-2020/) - वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को जानकी नवमी कहते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी दिन सीता का प्राकट्य हुआ था। इस पर्व को "जानकी नवमी" भी कहते हैं। - [ग्रहों के शुभ प्रभावों को बढ़ाने के उपाय](https://test.lifescience-forum.com/measures-to-increase-the-auspicious-effects-of-planets/) - प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों में एक अध्याय ग्रहजन्य कष्टों के निवारण के उपायों का होता है, जिसमें लग्नेश तथा लग्न के लिए शुभ ग्रहों का रत्न धारण करना, अनिष्टकारी ग्रहों की शांति के लिए उनका पूजन, मंत्र जप, हवन और ग्रह संबंधित वस्तुओं के दान का उल्लेख होता है। - [लग्न कुंडली के अनुसार रत्न](https://test.lifescience-forum.com/लग्न-कुंडली-के-अनुसार-रत्/) - रत्न पहनने के लिए दशा-महादशाओं का अध्ययन भी जरूरी है। केंद्र या त्रिकोण के स्वामी की ग्रह महादशा में उस ग्रह का रत्न पहनने से अधिक लाभ मिलता है। - [कशमकश](https://test.lifescience-forum.com/kashmakash/) - यह तो अंदाज-ए-बयां था साहब, कि हमने दर्द को भी एक नाम दिया वरना आजकल तो लोग बेनाम हुए जाते हैं, कहते हैं... चेहरे को देखकर बड़ा सुकून मिलता है। - [अक्षय तृतीया (26 अप्रैल 2020)](https://test.lifescience-forum.com/akshay-tritiya-2020/) - इस वर्ष अक्षय तृतीया, भगवान श्री परशुराम जन्मोत्सव पर्व 26 अप्रैल, रविवार को मनाया जायेगा। वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया (आखातीज) कहते हैं। - [गांव की आशा](https://test.lifescience-forum.com/indian-village/) - कृषि आधारित देश की नीतियां बाजार आधारित उद्योगों को केंद्र में रख कर बनाई जाती हैं। 1947 में विश्व GDP में जितनी भारत की हिस्सेदारी थी वही 2020 में भी बनी हुई है। - [मानव के बगैर धरती](https://test.lifescience-forum.com/मानव-के-बगैर-धरती/) - यदि आप मनुष्य हैं तो मनुष्यता धारित करें, जीयें और जीने दें। यह धरती जितनी आप की है उतनी ही अन्य प्राणियों की भी है। - [कोरोना : भावी राजनैतिक सम्भावनायें](https://test.lifescience-forum.com/corona-future-political-prospects/) - एक रिपोर्ट के अनुसार कोविड19 (कोरोना महामारी) के कारण भारत को तकरीबन 9 लाख करोड़ का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। - [शाहीनबाग और जनता कर्फ्यू](https://test.lifescience-forum.com/shaheenbagh-and-janata-curfew/) - धीरे ही सही लेकिन चीजे स्पष्ट होती जा रही हैं। शाहीन बाग जैसे चौराहों पर बैठी खातूने मूलतः दिहाड़ी मजदूर हैं जो बीड़ी, सिलाई - कढ़ाई आदि गृह उधोगों से परिवार का गुजारा चलाती हैं। - [स्वयं का चक्रव्यूह](https://test.lifescience-forum.com/own-trap/) - हमें यह तो ज्ञात है कि देश का निर्माण भूक्षेत्र, शासन, संप्रभुता और लोगों से होता है, जिसमें लोग सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। लोगों का व्यवहार उस देश के व्यवहार का निर्धारण करता है। - [वेणीमाधव प्रयाग के इष्टदेव](https://test.lifescience-forum.com/veni-madhav/) - प्रयाग की चर्चा बिना वेणीमाधव के अधूरी रह जाती है। वेद, स्कन्दपुराण, रामचरितमानस और प्रयाग माहात्म आदि ग्रन्थों में इनका वर्णन मिलता है, वेद में इनका वर्णन माधव नाम से है। - [अखाड़ा और नागा साधू](https://test.lifescience-forum.com/naaga-sadhu/) - अंग्रेजों के खिलाफ 1763 - 1773 के बीच प्रथम विद्रोह का बिगुल भवानी गिरि के नेतृत्व में दसनामी अखाड़े के सन्यासियों द्वारा फूंका गया। - [गुरु - शिष्य परम्परा](https://test.lifescience-forum.com/gurukul-tradition/) - शिष्य गुरु के लिए भिक्षा मांगता तथा उनकी आज्ञाओं का पालन करता था। गृह कार्यों में उनकी सहायता किया करता था। वह गुरु की निंदा न कर सकता था न सुन सकता था। - [नशे में बहकते युवा](https://test.lifescience-forum.com/drug-addiction/) - नशा एक ऐसी बुराई है जिसका असर व्यक्ति के साथ - साथ परिवार और देश पर भी पड़ता है। एक सरकारी आंकड़े के अनुसार 70 - 75% भारतीय किसी न किसी रूप में नशा करते हैं। - [गांधी, अम्बेडकर और गोडसे](https://test.lifescience-forum.com/gandhi-ambedkar-and-godse/) - अंबेडकर ने कहा मैं भले ही हिंदू धर्म का त्याग कर दूँ लेकिन किसी भी सूरत में में मुस्लिम नहीं बन सकता। मुस्लिमों के सम्बंध में उनके विचार उनकी पुस्तकों में आज भी पढ़े जा सकते हैं। - [वुहान का कोरोना वायरस](https://test.lifescience-forum.com/wuhans-corona-virus/) - शुद्ध भोजन करने से सत्व की शुद्धि होती है, सत्व शुद्धि से बुद्धि शुद्ध और निश्रयी बन जाती है फिर पवित्र और निश्रयी बुद्धि से मुक्ति भी सरलता से मिल जाती है। - [कोरोना वायरस और मांसाहार की नैतिकता](https://test.lifescience-forum.com/coronavirus/) - मनुष्य वही है जो मनुष्यता धारण करता है, अन्य प्राणियों के लिए भी उसमें मित्रवत भाव रहते हैं न की उन्हें भोजन के रूप में ग्रहण करने के। - [भारतीय दर्शन और कम्युनिस्ट](https://test.lifescience-forum.com/indian-philosophy-and-communist/) - जिन्हें सनातन व्यवस्था मूल रूप में नहीं पसंद है वह दूसरे रूप में आजमा सकते हैं। हम नास्तिक उसे मानते हैं जिनका वेद पर विश्वास नहीं है, नास्तिकता का ईश्वर से कोई लेना देना नहीं है। - [गंगा-जमुनी तहज़ीब](https://test.lifescience-forum.com/ganga-jamuni-tehzeeb/) - तहजीब की तालीम देने वाले कांग्रेसीयों! अरे, इन्हें बताओ कि गंगा और जमुना की तहजीब नहीं होती, यह दोनों ही सनातन धर्म से जुडी हैं। - [शाहीन बाग - टुकड़े गैंग](https://test.lifescience-forum.com/shaheen-bagh-protest/) - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के भी यहाँ दूसरे मापदंड हैं, जो हम बोलें वही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है भले ही वह देश को तोड़ने वाली हो। - [क्या हिंदू मूर्ख है?](https://test.lifescience-forum.com/hindu-are-fool/) - धर्म विहीनता एक छद्म विचार है क्योंकि कोई भी प्राणी धर्म विहीन नहीं रह सकता। यहूदी, ईसाई या मुस्लिम धर्म के जैसे ही सही या फिर सनातन धर्म की व्याख्या के अनुसार धर्म सम्मत राजनीति होनी चाहिए - [मातृभाषा हिंदी का सुखद क्षण](https://test.lifescience-forum.com/happy-moment-of-hindi/) - उल्लासित हिंदी भाषा ने, बालक को स्नेहिल प्यार दिया । आज सभी उस मातृभूमि व मातृभाषा का पूजन अभिनन्दन करते हैं ।। - [सिंडीकेट राजनीति और कम्युनिस्ट](https://test.lifescience-forum.com/syndicate-politics-and-communist/) - नेता, फिल्मकार, कथाकार, इतिहासकार और पत्रकार सब ने मिल कर अंग्रेजी विचार जिसके अनुसार तुम सभी भारतीय निर्धन ब्राह्मण, नट और सपेरे हो, तुम्हें आधुनिक बनाया जा रहा है इसलिए मौन रहो। - [भारत के कम्युनिस्ट](https://test.lifescience-forum.com/communist-of-india/) - मुस्लिम हाजी, गाजी, आतंकवादी, नारे तकवीर करें फिर भी सेकुलर हैं लेकिन हिंदू जरूर कट्टर होगा यदि उसने मुल्ले को शामिल न किया, उसकी मज्जमत की। - [नए वर्ष का नवल एवं मंगल काव्यधार](https://test.lifescience-forum.com/happy-new-year-poetry/) - उदित हुआ सूर्य नये वर्ष का, एक अलौकिक नव प्रकाश लिए। दिग् दिगंत सुरभित हुआ है, नव किसलय का सुगंध लिए। - [लोकतंत्र की कहानी](https://test.lifescience-forum.com/story-of-democracy/) - एक बार जंगल में मीटिंग हुई जिसमें सवर्मत से निर्णय लिया गया कि समता और समानता मूलक शासन की स्थापना हो, सभी को अवसर मिले और रोटेशन प्रणाली को लागू किया जाय। - [विद्या ददाति विनयं](https://test.lifescience-forum.com/education-system-of-india/) - विद्या का पर्याय शिक्षा है। विद्या ही मनुष्य को पशु से अगल कर 'मानव' बनाती है। मनुष्यता का अर्थ प्रेम और सौहार्द से है जो मनुष्य तक सीमित न रह सभी प्राणियों को छू ले। - [नगरिकता संशोधन अधिनियम (CAB) से किसे समस्या?](https://test.lifescience-forum.com/the-citizenship-amendment-bill-2019/) - यह बिल मुस्लिम देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से जो प्रताड़ित अल्पसंख्यक हिन्दू, जैन, बौद्ध, पारसी, सिख और ईसाई समुदाय जो धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत आये हैं उन्हें भारत की नागरिकता देकर सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार देना है। - [स्वयं को जानना](https://test.lifescience-forum.com/know-yourself/) - मैं हर उस व्यक्ति और वस्तु से प्रेम करता हूं जो मुझे सुख देती है क्योंकि मैं स्वयं से प्रेम करता हूं इसीलिए मेरा स्वभाव ही आनंद है। यह आत्मा आनंद का स्वरूप है। - [हिंदू हुआ सेकुलर](https://test.lifescience-forum.com/hindu-became-secular/) - अब हिंदू हुआ सेकुलर "न कोई टंटा न कोई झंझट चढ़ेगी चादर सलीब पे"। अरे विश्व मानव की प्रैक्टिस जो कर रहा है। जय बोलो विक्टोरिया माई की, अल्लाह,की और ईसू देउता की। - [बाल श्रमिक](https://test.lifescience-forum.com/child-labour/) - कोमल नन्हे सुकुमार प्रसून से ये सुन्दर बालक, इनके गुलाबी हाथों में किसने दिया ये फावड़ा व कुदाल? - [हिंदू कितनी बार पराजित होगा?](https://test.lifescience-forum.com/defeated-hindus/) - भारत के इतिहास में हिंदुओं की पराजय का एक मात्र कारण रहा, 'संगठित नहीं होना'। मुहम्मद बिन कासिम की 712 ईस्वी के युद्ध विजय का विश्लेषण करिये या महाराज दाहिर के पराजय का कारण, दोनों में एक यही कारण मिलेगा। - [खजुराहो मंदिर का रहस्य](https://test.lifescience-forum.com/the-secret-of-khajuraho-temple/) - खजुराहो के मंदिर का निर्माण 950 से 1050 ई0 के बीच धंगदेव, गंडदेव, विद्याधर के समय में हुआ था। प्रसिद्ध कंदरिया महादेव के मंदिर को चंदेल नरेश विद्याधर ने महमूद गजनवी को पराजित करने के उपलक्ष्य में बनाया था। - [चलो कहीं दूर... शहर की आबो हवा खराब है](https://test.lifescience-forum.com/delhi-pollution/) - चलो कहीं दूर चले हम शहर की आबो हवा खराब है न दिन को शुकूं है शाकी न ही रात पे इतबार है - [निर्धन](https://test.lifescience-forum.com/poor/) - निर्धन तेरी दयनीय दशा पर क्या किसी को भी तरस ना आया? - [गांधी जी की बंदूक](https://test.lifescience-forum.com/gandhijis-non-violence/) - अहिंसा एक स्वप्न है और बंदूक जाग्रत इतिहास! - [नया संकल्प नया इरादा](https://test.lifescience-forum.com/naya-sankalp/) - इस विद्यालय में एक अनोखी सुबह हुयी। नन्हे - नन्हे शिशुओं के मन में, एक अनोखी उमंग जगी। - [मुस्लिम पुनर्जागरण](https://test.lifescience-forum.com/muslim-renaissance/) - विश्व के अन्य धर्मावलंबीयों को मुसलमान के हिंसक बर्ताव से घृणा करने से पहले इस्लाम में आमूलचूल परिवर्तन जरूरी है। - [मध्यपूर्व युद्ध के बादल](https://test.lifescience-forum.com/war-clouds/) - राजनीति का रंग सुर्ख लाल है या खूनी, जो भी समझ लें लेकिन मुख्य बात यह है कि मुस्लिम जिस फ़िरके के हैं उसके अलावा सभी फ़िरके, पंथ, संप्रदाय और धर्म को वो झूठा मानते हैं। - [गणित की दुनिया](https://test.lifescience-forum.com/india-maths/) - मनुष्य और गणित साथ - साथ विकसित हुए लेकिन मानवता की गाथा में गणित की यात्रा पीछे छूट गई। हम आज जिस विकास की बात करते हैं हकीकत में वह गणित पर ही आधारित है। - [आओ दिखाये सेक्स की नई एक कहानी](https://test.lifescience-forum.com/vulgarity-on-tv/) - शिक्षा मनुष्य को जानवर से अलग करती है लेकिन आज की उपयोगितावादी आत्मकेंद्रित शिक्षा व्यक्ति को फिर से जानवर बनने के लिए धकेल रही है। - [गांधी जी क्या हो गये](https://test.lifescience-forum.com/gandhi-ji/) - गांधी जिंदाबाद थे, हैं और रहेंगे। वह कल भी राजनीतिक महात्मा थे और आज भी हैं। वह तब भी राजनीति के पर्याय थे और आज भी हैं। - [ईर्ष्या](https://test.lifescience-forum.com/the-envy/) - एक कस्बे में एक आदमी रहता था वह फूलों का व्यवसाय करता था। रोज सुबह वह शहर जाकर फुल लाता था और उसे मंदिर के पास बेचा करता था - [आरक्षण खत्म करने के उपाय](https://test.lifescience-forum.com/how-to-end-reservation/) - पूर्व राष्ट्रपति व भारत रत्न डॉ अब्दुल कलाम ने विजन 2020 दिया था जो विकसित भारत की कल्पना थी। हम जल्द ही 2020 में प्रवेश करने वाले हैं। - [आर्यन अफवाह में भारतीयों का योगदान](https://test.lifescience-forum.com/contribution-of-indians-to-aryan-rumor/) - हम भारतियों को इतिहास से सीख लेने की आवश्यकता है। हमें यह समझने की आवश्यकता है कि मुस्लिमों ने भारत में सामाजिक और धार्मिक लूट की जबकि ईसाई-अंग्रेज ने सांस्कृतिक लूट की। - [राघवयादवीयम् - ‘अनुलोम-विलोम काव्य'](https://test.lifescience-forum.com/sri-raghava-yadhaveeyam/) - क्या ऐसा संभव है कि जब आप किताब को सीधा पढ़ें तो राम कथा के रूप में पढ़ी जाए और जब उसी किताब में लिखे शब्दों को उल्टा करके पढ़ें तो कृष्ण कथा हो जाए? - [सच्चाई का साहस - उन्मादी विचार](https://test.lifescience-forum.com/courage-of-truth/) - धार्मिक कट्टरता और उससे जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा नहीं देते तो क्या रोहिंग्या को म्यामांर से भगाया जाता, चीन मस्जिदें गिरता, सार्वजनिक जगह पर नमाज प्रतिबंधित करता, इनके मदरसों पर प्रतिबंध लगाता? - [नाकाम मुल्क पाकिस्तान](https://test.lifescience-forum.com/pakistan-a-failed-country/) - मोदी सरकार ने विश्व के मंच से पाकिस्तान को अलग - थलग कर दिया है, उसे सिर्फ चीन का समर्थन है क्योंकि ग्वादर बन्दरगाह से लेकर सुरक्षा, सड़क पर बहुत बड़ा इन्वेस्टमेंट है। - [बहकता समाज और बारूद को देती चिंगारी](https://test.lifescience-forum.com/modern-society/) - सभी या तो मौन हैं या जिम्मेदारी दूसरे पर डाल रहे हैं। राजनीतिक वजीफा पाकर सामाजिक चिंतन शून्य है। - [आओ सोचें भारत](https://test.lifescience-forum.com/think-india/) - भारत में कई तरह के विचार हैं समस्या रायचन्दी टाइप के लोगों का है, कहते हैं ऐसे नहीं ऐसे चलो। - [गाड़ी मेरी धुआं छोड़ती है, छोड़ती थी जहर कभी, अब ओक्सिजन छोड़ती है](https://test.lifescience-forum.com/poetry-on-pollution/) - गाड़ी मेरी धुआं छोड़ती है, छोडती थी जहर कभी, अब ओक्सिजन छोडती है - [स्त्री - पुरुष भिन्न या अभिन्न : पुत्री - पुत्र समानता](https://test.lifescience-forum.com/male-or-female/) - होड़ और जोड़ में मैं भी पुरुष बनूंगी और ये बेजा की दौड़ पश्चिमी सभ्यता द्वारा उत्पन्न मानसिक विकृति की देन है। धर्म की उचित और निर्दिष्ट विधियां ही धर्म की प्राप्ति कराती हैं। - [काहे का लोकतंत्र](https://test.lifescience-forum.com/what-democracy/) - असंगठित मध्यमवर्ग और किसान भगवान और भाग्य को कोस कर उम्मीदों के सहारे चल रहा है कि एक दिन भगवान न्याय करेगा। - [Life की Tik Tok](https://test.lifescience-forum.com/tik-tok-of-life/) - विचारों का अभाव, विवाद जोरदार, स्वार्थ और एक अंधी दौड़ किन्तु जाना कहा है? न मंजिल है न रास्तों का पता है बस लाइफ में ट्विस्ट चाहिए और मजे भी, लोग वाहवाही करें बस इतनी सी चाहत का झोला लिए भटक रहे हैं। - [जातियों का राजनीति शास्त्र](https://test.lifescience-forum.com/castes-political-science/) - [भारत बनने की कहानी](https://test.lifescience-forum.com/india-story/) - प्राचीन काल से भारत विश्व के लिये कौतूहल का विषय था ज्ञान - विज्ञान, समाज, शिक्षा जिसमें भारद्वाजीय विश्वविद्यालय तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला, बालभी, दक्षिण के मंदिर भी शिक्षा के बड़े केंद्र थे। - [सत्ता की सियासत](https://test.lifescience-forum.com/power-politics/) - आपको यह विचार करना है कि आप किसी भी धर्म के होने से पहले भारतीय हैं और इसकी संस्कृति, सौहार्द की रक्षा करना आपका दायित्व है। - [भगवान श्रीकृष्ण](https://test.lifescience-forum.com/lord-krishna/) - भजन को कल पर न डालिये आज ही कर लीजिए इस नश्वर शरीर का कोई भरोसा नहीं है। - [विचारों का भ्रमजाल](https://test.lifescience-forum.com/confusion-of-ideas/) - यदि आप सोचते हैं कि आपकी किसी को चिंता है तो गफलत में हैं, यह विचार दुरुस्त करिए। आप खुद ही अपने माता - पिता, भाई और रिश्तों पर ऊंची छलांग लगाकर बेहतर की खोज कर रहे हैं। - [स्वतंत्रता मेरी या तेरी](https://test.lifescience-forum.com/freedom07789/) - आप स्वयं के साथ - साथ राष्ट्र के महत्व को भी समझेंगे, स्वतंत्र है तो स्वतंत्र आचरण करेगें। लोगों के साथ समस्त प्राणीयों की स्वतंत्रता का चिंतन मानस पटल पर चित्रित करते रहेंगे। - [सत्ता के लिए मां का दांव](https://test.lifescience-forum.com/bad-politics/) - अब जनता जागृत हो रही है, उसे भी पता है सच क्या है। चुनाव दर चुनाव सत्तालोलुप नेताओं और उनकी पार्टी को जमीन दिखा रही है। - [विनाश के निकट कांग्रेस](https://test.lifescience-forum.com/congress-near-destruction/) - कांग्रेस का थिंक टैंक को शुक्रिया कहा जाय या नकारापन जो बार - बार वही घिसी पिटी सलाह दे कर कान्ग्रेस को ICU में पहुँचा दे रहा है। - [पाकिस्तान में उठती आवाजें, भारत में विलय की](https://test.lifescience-forum.com/rising-voices-in-pakistan-merged-with-india/) - यह समय इतिहास की गलतियों को सुधारने का है भारत, पाकिस्तान की मजलूम की आवाज सुने, आम जनता की आवाज बने। पाकिस्तान की नीति पर विचार करे कि क्या पाकिस्तान का मुल्क भारतीय मानचित्र के साथ सही है? - [विश्वास की शक्ति](https://test.lifescience-forum.com/power-of-faith/) - हम इंसानों को भगवान ने एक विशेष शक्ति देकर भेजा है। वो है विश्वास की शक्ति। - [जड़ो की ओर लौटता पाकिस्तान](https://test.lifescience-forum.com/pakistan-returns-to-roots/) - यदि भारतीय मुसलमानों पर गौर फरमाये तो वह अभी भी गजनवी, गोरी, तैमूर, अब्दाली की परंपरा को उठाएं चल रहे हैं। इतने साल हिन्दू – मुस्लिम साथ में रहने के बाद भी जुदा – जुदा क्यों हैं? - [मुस्लिम साम्प्रदायिकता](https://test.lifescience-forum.com/muslim-communalism/) - मुस्लिम साम्प्रदायिक सोच कट्टरपंथी नफरत से निकल कर प्रेम और अमन की संगत करें। गलत का विरोध शांतिपूर्वक भी किया जा सकता है। - [पिशाच का समाज](https://test.lifescience-forum.com/vampire-society/) - मूलस्वभाव अंत:करण के आवाज सब सो गये हैं। जब तक समस्या के मूल में प्रहार न करेंगे तब तक तो आप वोट ही बनेंगे और भौतिक ईकाई मनुष्य के रूप में स्वीकार नहीं होंगे। - [संगठित समाज या उपेक्षित अवधारणा](https://test.lifescience-forum.com/organized-society-or-neglected-concept/) - सामाजिक घटक बेहतरीन ढंग से कार्य करें। सामाजिक स्थिरता और उसके स्थिर चरित्र पर स्वस्थ्य समाज का निर्माण होता है। जब सामाजिक विमर्श को राजनीति में पिला देते हैं तब वह मूल से भटक जाता है। - [चालक मानव! दुहाई राम और व्यवस्था की](https://test.lifescience-forum.com/human-mentality/) - हम सब करने को तैयार हैं सिवाय गरीब के पीठ से उतरने को। किसी भी सुधार के लिए पार्लियामेंट और नेता की तरफ झांकते हैं। - [नारी देह एक विमर्श](https://test.lifescience-forum.com/woman-gg/) - स्त्री हो या पुरुष, उसे यह देखना होगा कि किसी की स्वतंत्रता, स्वच्छन्दता में और अधिकार असीमित न होने पाए। समय समय पर सामाजिक चिंतन हो जिसमें मुद्दा सामाजिक बेहतरी का रहे। - [स्त्री कैसे आयी](https://test.lifescience-forum.com/how-did-the-woman-come/) - पुरुष नारी को लेकर पहुँच गया देव लोक, कहा प्रभु ये नारी आप ही रख लीजिये बहुत झंझट करती है। जीवन से शांति भंग हो गई जब से यह मिली है। - [नसीहत मोदी सरकार को](https://test.lifescience-forum.com/to-the-modi-government/) - गर वो नहीं बदले तो ये जमाना जो खुद ही बदल जाएगा मिली थी जो ये दौलत की चाबी ताला तो होगा पर चाबी स्वत: ही बदल जाएगा - [तू ही राक्षस है](https://test.lifescience-forum.com/you-are-the-monster/) - आप के कर्म आपको देवता और राक्षस दोनों ही बना सकते हैं। इस लिये अंदर के मानव को जाग्रत करिये दानव को नहीं। - [वास्तविकता](https://test.lifescience-forum.com/the-reality/) - धर्म की आलोचना करिये किन्तु शास्त्रों के अध्ययन के बाद क्योंकि विज्ञान, व्यथित और वर्चुअल मनुष्य बना रही है जो भौतिक सुखों की तलाश में पूरा जीवन व्यर्थ कर दे रहा है। - [समस्या कश्मीर की या भारत की](https://test.lifescience-forum.com/kashmir-poblems/) - भारतीय राजनीति सेकुलर का चोंगा ओढ़ सिर्फ तमाशबीन बनी रही। कश्मीरी पंडित अपने ही मुल्क और लोकतांत्रिक देश में शरणार्थी बन गया। कोई नेता उनका हाल पूछने तक कैम्प में नहीं गया। - [सच कहना गुनाह तो नहीं?](https://test.lifescience-forum.com/truth-is-not-lie/) - सच मैं कहता हूँ तुम बगावती कह दो मुझे चाहे मैं होश में रहता हूँ मदहोश कह दो मुझे चाहे - [●करुण सिसक● कौन है वो?](https://test.lifescience-forum.com/karuna-sisak/) - जिसे नारी का सम्मान नहीं उसे समाज में रहने का अधिकार नहीं। अभी भी वक्त है हम लौट सकते है मनुष्यता के रास्ते पर, लेकिन श्रमसाध्यता करनी होगी। - [बेटियाँ](https://test.lifescience-forum.com/daughters/) - काश ये बात दुनियां के हर मां बाप भी समझ जाएं कि बेटी को पढ़ा लिखा कर इतना "काबिल" बना दो कि लड़के वाले खुद लड़कियों के रिश्ते, उनके लिए लेकर आएं। - [गवाह बनिए मेट्रो की बर्बादी का](https://test.lifescience-forum.com/free-metro/) - अगर आप आज जितनी महिलाएं मेट्रो में सफर करती हैं उस हिसाब से अंदाजा लगाना चाहते हैं, बजट बनाना चाहते है तो आप किसी गलतफहमी में हैं। - [रहमत का सबब](https://test.lifescience-forum.com/rahmat/) - बा वफ़ा चरागों ने न की होती रौशनी रौशन कभी न होती शमा से कोई तो पूछो आंधियों ने दिए हैं कितने जख्म बेचारी जल भी कहाँ पाती ग़र मंजूर ए खुदा न होता - [जरा सा पाप](https://test.lifescience-forum.com/just-a-bit-of-sin/) - हर जीव अपने कर्म के लिए उत्तरदायी होता है। उसे अपना कर्म अच्छा रखना है। आपको चारों द्वारों पर बैठे चार मायावी तो बहकाने आएंगे ही। आपने उनकी माया को जीत लिया तो अनंत कोष आपके लिए खुला है, अन्यथा संसार से विदा नहीं होंगे, दुत्कार कर भगाए जायेगे। - [मैं और तू](https://test.lifescience-forum.com/me-and-you/) - हमनें क्या खोया और क्या पाया? कल तक जो हमसे प्रेम करते थे, आज नफरत क्यूँ करने लगे? ये अतीत हमें सिखाता है। बस आप को झोली खोलनी होगी। - [मंदिर और मुसलमान](https://test.lifescience-forum.com/temple-and-muslims/) - मुसलमानों को विचार करना है कि अहंकार छोड़ बंधुता के रास्ते चलना है और दीन और ईमान लाना है या जिहाद के नाम पर आतंकवाद जैसी शैतानियत पर फक्र करना है? - [वीर विनायक दामोदर सावरकर](https://test.lifescience-forum.com/veer-savarkar/) - भारत को स्वतंत्र कराने के लिए वीर सावरकर ने सशस्त्र विद्रोह की वकालत की और साथ देने के जुर्म में जेल गये। काला पानी से जब लौटे तो भारतीय राजनीति में गांधी जी का समय और तुष्टिकरण की राजनीति शुरू हो चुकी थी। - [मोदी युग](https://test.lifescience-forum.com/modi-era/) - देश बदल रहा है, सत्रहवें लोकतंत्र के चुनाव महोत्सव के परिणाम के साथ ही एक बात स्पष्ट हो गई है कि किया गया परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाता है। - [विजयश्री](https://test.lifescience-forum.com/grand-victory/) - हुंकार सुन फुंफकार सुन उसके गाण्डीव की टंकार सुन - [ये अनंत आकाश हमारा है](https://test.lifescience-forum.com/this-infinite-sky-is-ours/) - ऐ नादां परिन्दे तुने समझा क्या था ये अनंत आकाश हमारा है - [समस्या की रोनी सूरत](https://test.lifescience-forum.com/problems/) - क्या हम सब एक बार उस रस्ते चल कर नहीं देख सकते जो कह रहा है कि कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी। वो माँ भी तुम्हारा इंतजार कर रही है। - [प्रिय सखी को चिट्ठी](https://test.lifescience-forum.com/letter-to-a-friend/) - पंचतत्व, ज्ञानेन्द्रिया, कर्मेन्द्रियों, मन, चित, बुद्धि और अहंकार की जो यह सतत प्रक्रिया आत्मा की ओर बढ़ने की है, कुछ इसी तरह का मेरा प्रेम है जहाँ द्वैत नहीं अद्वैत है। - [मेरा खोया बचपन](https://test.lifescience-forum.com/lost-childhood/) - वह भी क्या जमाना था जब अपनों से ही आशियाना था। जिसमें बस चलते ही जाना था। बचपन के वो दिन भी क्या थे, न कोई चिंता, न कोई रोक, जब जैसे मन हो वही कर लेने की आज़ादी। - [बेरोजगार लोग बदहाल कृषि](https://test.lifescience-forum.com/unemployed-people/) - श्रम शक्ति को बस दिशा चाहिए जिससे लोगों को भी लगने लगे कि वह देश निर्माण में भागीदारी कर रहे हैं। - [डर या भय का मनोविज्ञान](https://test.lifescience-forum.com/psychology-of-fear/) - भय मनुष्य की स्वाभाविक प्रक्रिया है सभी व्यक्ति को डर लगता है। यदि कोई कहता है कि वह नहीं डरता तो समझिये वह डरपोक के साथ झूठा भी है। - [माँ की ममता](https://test.lifescience-forum.com/mothers-day/) - ऐ मां! तुझ साइस धरती पर,जिन्दा भगवान् नहीं देखा। - [मोदी देश के लिए जरुरी क्यों? क्यों प्रचंड बहुमत की ओर?](https://test.lifescience-forum.com/why-modi-ji/) - मोदी जी ही प्रधानमंत्री पद के लिए योग्य, उपयुक्त और देश के भविष्य के लिए आवश्यक हैं। लगभग सभी क्षेत्रों में मोदी जी के विगत पांच वर्षों के कार्यों ने यह सिद्ध भी किया है - [नेहरू इंदिरा राजीव](https://test.lifescience-forum.com/gandhi-family/) - अभी तो भारत के कई ऐतिहासिक दस्तावेज अंग्रेजों ने दबा लिए हैं जो समय के साथ जल्द प्रकट होंगे। तब सारे कृत्य भी उजागर होंगे आखिर भारत में किसकी भूमिका क्या थी। - [सब कुछ बदल गया है..](https://test.lifescience-forum.com/everything-has-changed/) - आज सब कुछ बदल गया हैसुख दुख में सब थे साथीतब जमाना था वो कैसाआज सब कुछ बदल गया है - [मेरा मानव मुझे लौटा दो](https://test.lifescience-forum.com/give-back-my-humanity/) - स्वयं को पहचानो, उस निर्माता की श्रेष्ठ रचना हो तुम जो स्वतंत्र बुद्धि से सब का चिंतन कर सकता है। - [मोदी है तो मुमकिन है](https://test.lifescience-forum.com/modi-magic/) - [कांग्रेस को मोदी जी की चुनौती](https://test.lifescience-forum.com/modi-challenge-to-congress-party/) - प्रधानमंत्री मोदी जी ने कांग्रेस को चुनौती दी है कि अगर कांग्रेस में दम है तो राजीव गाँधी के मुद्दे पर आगे के चरणों का चुनाव लड़ कर दिखाएं। - [चाहत अपने में चलने की](https://test.lifescience-forum.com/walk-together/) - [इतिहास के आईने में आरक्षण का खेल](https://test.lifescience-forum.com/reservation-game/) - जिस तरह से अब नये - नये वर्ग द्वारा नई - नई आरक्षण की मांग की जा रही है और अपने को पिछड़ा दिखाने की होड़ लगी हुई है। ट्रेन रोकना, सड़क जाम और तोड़फोड़ आये दिन होती है, वह आसार तो बना ही देता है कि अब इसे खत्म करने के लिए सिविल वार की ही जरूरत पड़ेगी। - [गधे की कब्र](https://test.lifescience-forum.com/donkey-grave/) - बड़े खादिम ने कहा चिंता बिल्कुल न करो और लगे रहो मेरी वाली जो कब्र है वह भी एक गधे की है लेकिन लोंगो की मन्नते पूरी हो रही है तो चुप रहना ही ठीक है। दमड़ी तो मिल ही रही है। - [नई सदी का विश्व युद्ध](https://test.lifescience-forum.com/next-world-war/) - सत्ता पक्ष और विपक्ष में तल्खियां दिनों - दिन बढ़ती ही जा रही हैं, कमोबेस पूरे विश्व भर का हाल एक सा ही है। सहनशीलता घटती जा रही है। 'आगे क्या होगा' कि स्थिति मुँह बाये हर वक्त खड़ी है। - [आधा सच पूरी कहानी](https://test.lifescience-forum.com/half-truth-full-story/) - हिन्दू, मुस्लिम के नाम पर भारत दो देशों में बट चुका था कुछ लोगों का कहना था प्रस्ताव पास करके अयोध्या, काशी, मथुरा में मंदिर बन जाये लेकिन नेहरू की आस्था हिन्दू में सिर्फ राजनैतिक थी। - [टिटहरी का दुस्साहस](https://test.lifescience-forum.com/audacity/) - समझने कि बात है कि एक चिड़िया भी यदि ठान ले तो कुछ भी कर सकती है, आप तो मनुष्य हैं जिसमें अनंत सामर्थ्य है। बस लक्ष्य निर्धारित करिये उसे पूरा करने के लिए डट जाइये। - [आओ उड़ चले](https://test.lifescience-forum.com/lets-fly/) - कशिश जीने की अपनो से छूटने की, कोई है, कोई होगाफिर भी वहीं जाना होगा.. फिर भी वही जाना होगा।। - [भारत के पतन में ही उत्थान के सूत्र हैं](https://test.lifescience-forum.com/india-rising/) - किसी भी देश की ईकाई उसका समाज होता है, समाज की ईकाई परिवार और परिवार की ईकाई व्यक्ति होता है। सुधार निचले स्तर यानि व्यक्ति के स्तर पर ही करना पड़ता है और व्यक्ति के सुधरने की ईकाई मां और शिक्षाव्यवस्था है। - [काम की अनंत इच्छाएं](https://test.lifescience-forum.com/endless-desires-of-sex/) - 21वीं सदी का विश्व रिश्तों को लेकर नई अंगड़ाई ले रहा है। समलैंगिक, लेस्बियन, गे, ट्रांसजेंडर के साथ साथ पालीएमरस रिश्ते की बात हो रही है। - [आम चुनाव और लोग](https://test.lifescience-forum.com/general-election/) - चुनाव के प्रति उदासीन रहना या यह सोचना कि मेरे एक वोट डालने से कुछ नहीं हो जायेगा। ऐसा नहीं होना चाहिए, यदि ऐसा सभी ने सोच लिया तब क्या होगा? - [राष्ट्र परमों धर्म:](https://test.lifescience-forum.com/nation-first/) - हमें समझना होगा जन्मभूमि और राष्ट्र का क्या महत्व है। जीवन में सिर्फ वाचालता और उच्चश्रृंखलता से काम नहीं चलेगा। भारत राष्ट्र के लिए बहुत लोगों ने प्राणोत्कर्ष किया है। - [हे भगवान! फिर कब आओगे?](https://test.lifescience-forum.com/god-when-you-will-come/) - मूल स्वभाव और स्वरूप से अंजान मानवता पूजा पद्धति मे बट गई, सबको चिंता है अपने आने वाले कल की कोई बीता याद नहीं करना चाहता कोई बीते कल से निकलना नहीं चाहता है बस आने वाले कल का ध्यान सब को है मगर आज का क्या? - [हमें क्या दे सकते हो?](https://test.lifescience-forum.com/what-you-will-give/) - भारतीय संस्कृति देने में विश्वास करती है लेने में नहीं। यदि समाज में किसी प्रकार की गड़बड़ी है तो उसकी जिम्मेदारी किसी एक की न हो कर समूहिक होगी। - [दिव्य यात्रा- 2 बद्रीनाथ](https://test.lifescience-forum.com/holy-journey-2/) - मेरे जीवन का अबतक का सबसे अद्भुत अनुभव जो शायद शब्दों के माध्यम से नहीं कहा जा सकता है लेकिन मेरे शब्द और आप के भाव मिल जाये तो जय श्री हरि। - [दिव्य यात्रा](https://test.lifescience-forum.com/holy-journey/) - जनकपुर, यही वह भूमि थी जिसने भारत के नारी का चरित्र गढ़ दिया। मां सीता जैसा चरित्र हम लोग मां, बहन, पत्नी में देखने लगे। - [आयातित विचार](https://test.lifescience-forum.com/आयातित-विचार/) - संस्कृति की रक्षा करने वाला समुदाय सिर्फ मूक दर्शक बना है दोषारोपण करके वह बच नहीं सकता है। आज की परिस्थितियों में जिस भारतीय संस्कृति की बात करते हैं वह कहाँ जीवित है? देखेगे तो पता चलेगा संख्या बहुत कम है। - [सुप्रीमकोर्ट और समाज की उधेड़बुन](https://test.lifescience-forum.com/सुप्रीमकोर्ट-और-समाज/) - सुप्रीम कोर्ट का निर्णय ST/SC एक्ट पर हो या आज आये प्रमोशन के नागराज मामले में संशोधन से जुड़ा हो, उसने सरकार और समाज को आईना दिखाने का ही काम किया है। - [क्या ईश्वर है?](https://test.lifescience-forum.com/क्या-ईश्वर-है/) - मैं कहता हूं ईश्वर है, वे कहते हैं ईश्वर कुछ नहीं होता है। मैं कहता हूँ ईश्वर ही हमारे हमारे पूर्वज हैं पिता हैं, वे कहते हैं मनुष्य ही अपना पिता स्वयं है। - [मौन अमावस्या की संस्कृति](https://test.lifescience-forum.com/मौन-अमावस्या-की-संस्कृति/) - मास को दो पक्ष में विभाजित किया गया है शुक्लपक्ष और कृष्णपक्ष। शुक्लपक्ष में पूर्णिमा और कृष्णपक्ष में अमावस्या यदि वही अमावस्या प्रयाग के कुंभ में पड़े तो मौन स्नान मौन संस्कृति को प्रकट करती है। - [षड़यंत्र भारतीय संस्कृति के साथ](https://test.lifescience-forum.com/षड़यंत्र-भारतीय-संस्कृति/) - भारतीय संस्कृति को बदनाम किया गया उसके रक्षक ब्राह्मण और क्षत्रिय को समाजवाद के ढकोसले के कारण राक्षस का रूप देने का प्रयास किया गया। जिसे संस्कृत भाषा नहीं पता वो अंग्रेजी पिता की पुस्तक पढ़ के भारतीय शास्त्रों की आलोचना लिख दी। - [वीर भोग्ये वसुन्धरा](https://test.lifescience-forum.com/वीर-भोग्ये-वसुन्धरा/) - हे वीर आज जो तुम रणभूमि में पड़े हो कभी तुम्हारे चलने से धरती डोलती थी। तूमने रण में किसे धूल नहीं चटाई? विश्व को जिसने एक बाण में बांध दिया। - [धर्म की पुकार](https://test.lifescience-forum.com/धर्म-की-पुकार/) - सब अपने धर्म का पालन कर रहे, सिर्फ मनुष्य को छोड़ कर। जिस दिन वह धर्म के पालन पर चल दिया समझिये समस्याओं की आहुति हो गई। - [भारत महाभारत](https://test.lifescience-forum.com/भारत-महाभारत/) - भारत न रुका है न थका है किन्तु उसका मन थका है, थकना मतलब ठहराव। देखा जा सकता है वो पिपासा वो अभिलाषा ज्ञान विज्ञान को लेकर नहीं है जो होनी चाहिए हम विचारों के आयातक पिछले कई सदियों से बने हुये है। - [मैं की खोज](https://test.lifescience-forum.com/मैं-की-खोज/) - धरती अपना शरीर मांग रही है। यदि इन्हें इनकी चीजे लौटा भी दूँ तो क्या ये मेरा “मैं” दे पाएंगे? मुझे अपनी सुधि होते ही ये ब्रह्माण्ड साफ हो सकता है। - [₹पये की कीमत](https://test.lifescience-forum.com/₹पये-की-कीमत/) - यही मुद्रा रुपया भारत में ब्रिटिश मुद्रा प्रणाली का आधार बना आधुनिक रुपया अंग्रेजों द्वारा 1835 में जारी किया गया। 1947 में जब अंग्रेज भारत से जाने लगे तो एक रुपया एक डॉलर के बराबर था। - [अयोध्या का राम मंदिर](https://test.lifescience-forum.com/अयोध्या-का-राम-मंदिर/) - जो मूर्ति पूजक नहीं है उसे मक्का में मस्जिद, वेटिकन (रोम) में चर्च की आवश्यकता क्यों है? येरुशलम के लिये यहूदी, मुस्लिम, ईसाईयो का त्रिपक्षीय संघर्ष क्यों जारी है? - [परिवर्तन](https://test.lifescience-forum.com/परिवर्तन/) - हम सिर्फ़ वही बदल सकते है जो बदलना चाहते है। मन, वाक, संकल्प से परिवर्तन निःसंदेह होता है। बस हमें ऊर्जा के स्वरूप को समझना है। - [प्रकृति की पीड़ा](https://test.lifescience-forum.com/प्रकृति-की-पीड़ा/) - या हम सब एक बार उधर चल के नही देख सकते जो कह रहा है कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी। वो माँ इंतजार कर रही है तुम्हारा। - [बकरी प्रश्न](https://test.lifescience-forum.com/बकरी-प्रश्न/) - पुलिस बनी चोर नेता हुआ घुसखोर, अधिकारी हुये भ्रष्टाचारी, देश हुआ कमजोर, जनता बनी निरीह बकरी पात की। - [शैडो लोकतंत्र](https://test.lifescience-forum.com/shadow-democracy/) - लोकतंत्र की जो सबसे बड़ी परिभाषा है लोगों का शासन लोगों के द्वारा और लोगों के लिये। विश्व के लोकतांत्रिक देशों पर नजर डालें बमुश्किलन एक या दो देश इस खांचे में फिट बैठते है जिसमें स्विट्जरलैंड एक है। - [नारी का शास्त्र](https://test.lifescience-forum.com/woman-ology/) - नारी सम्मान और प्रेम की गाथा भारतीय संस्कृति है जिसे हम भूल गये है अपनी संस्कृति का ज्ञान नहीं है। हम पश्चिमी सभ्यता के बहकावे में आ जाते है। - [इनर इंजीनियरिंग](https://test.lifescience-forum.com/inner-engineering/) - हमारी आंखे एक करोड़ अलग अलग रंगों की पहचान कर सकती है। हमारा हृदय पूरे जीवन काल मे 3 अरब बार धड़कता है। आंखे अगर कैमरा होती तो 576 मेगा पिक्सल की होती। 90% बीमारी कारण हमारा तनाव होता है। - [अफ्रीका : दो ध्रूवों की प्रयोगशाला](https://test.lifescience-forum.com/africa-a-laboratory/) - एक बार डेंसमण्ड टूटू ने अंग्रेजों के लिए कहा था - उनके पास बाइबिल थी हमारे पास जमीन। जब उन्होंने बाइबिल की कहानी सुनाई तो आंख बंद हो गई। आंख खुली तो बाइबिल हमारे हाथ में थी जमीन उनके पास। | अफ्रीका : दो ध्रूवों की प्रयोगशाला - [सनातन संस्कृति की चोरी](https://test.lifescience-forum.com/cultural-theft/) - विश्व में सभी धर्मों ने अपना विस्तार करने के लिए हिंसा का सहारा लिया लेकिन वहीं सनातन हिंदू धर्म ही एक मात्र ऐसा रहा है जिसने हिंसा या बल का प्रयोग धर्म प्रसार के लिए कभी नहीं किया। | सनातन संस्कृति की चोरी - [जल बिना जीवन](https://test.lifescience-forum.com/life-without-water/) - विश्व इतिहास में हम पढ़ते हैं कि कितनी ही ऐसी सभ्यता ऐसी थीं जो नदी तट पर विकसित हुईं और नदियों के धारा बदल जाने से वह सब नष्ट हो गयी। आज भी कई खण्डर हो चुकी या रेत में दब चुकी सभ्यता भी हमें दिखाई पड़ती है। | जल बिना जीवन - [मुस्लिम मजहब की हकीकत](https://test.lifescience-forum.com/reality-of-muslim-religion/) - जिस जमीन पर रहते हो, जो तुम्हारा भरण पोषण करती है, वही तुम्हारी मादरे वतन है। उससे गद्दारी करके तुम्हें जहन्नुम में जगह अता न होगी। फिर भी तुम गद्दारी कर रहे हो। मार, काट, बम विस्फोट करके तुम्हें 50 सालों में क्या मिला? | मुस्लिम मजहब की हकीकत - [द्रोपदी की पुकार](https://test.lifescience-forum.com/draupadi-ki-pukar/) - हरे कृष्ण आओ कृष्ण आओ कृष्ण मेरे कृष्ण, सभा बीच में जब द्रोपदी पुकारी है। कहां जा छुपे हो बता दो मनमोहना, ये नीच दु:शासन खींचन लागो मेरी साड़ी है। | द्रोपदी की पुकार - [रामेश्वरम और दक्षिण भारत की यात्रा – भाग २](https://test.lifescience-forum.com/rameswaram-and-south-india-part-2/) - यह दक्षिण के प्रसिद्ध राजवंशों चोल, चेर, पांड्य और पल्लव में पल्लव राजाओं की राजधानी रही है। यहां स्थित कैलाश मंदिर एकम्बरम शिवलिंग द्रविण शैली का उत्कृष्ट मंदिर है, भगवान की पूजा सातवीं सदी से निर्बाध और निरंतर जारी है। | रामेश्वरम और दक्षिण भारत की यात्रा – भाग २ - [रामेश्वरम और दक्षिण भारत की यात्रा – भाग ३](https://test.lifescience-forum.com/rameswaram-and-south-india-part-3/) - यहां की सबसे बड़ी विशेषता है उगते सूर्य नारायण की छवि जिसे देखने के लिए रोज हजारों यात्री आते हैं। सूर्य निकलने से पहले ही कैमरा, मोबाइल लिए चित्र खींचने के लिए उत्सुक दिखते हैं।| रामेश्वरम और दक्षिण भारत की यात्रा – भाग ३ - [मेरी द्वारकाधीश और सोमनाथ यात्रा – भाग १](https://test.lifescience-forum.com/dwarkadhish-and-somnath-yatra-part-1/) - 29 अक्टूबर 2019 को भारत के तीसरे धाम की यात्रा प्रारंभ हुई। यात्रा के साथी विनय जी थे जिनके साथ पूर्व में जगन्नाथ पुरी की यात्रा संपन्न हुई थी। | मेरी द्वारकाधीश और सोमनाथ यात्रा – भाग १ - [मेरी द्वारकाधीश और सोमनाथ यात्रा – भाग २](https://test.lifescience-forum.com/dwarkadhish-and-somnath-yatra-part-2/) - भारत की स्वतंत्रता के पश्चात लौहपुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल ने संकल्प लिया कि मंदिर की पुनः स्थापना उसी स्थान पर की जायेगी। यह राष्ट्र को 1955 इस्वी में भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र बाबू द्वारा समर्पित किया गया और 1995 इस्वी में पूरी तरह से बन कर तैयार हुआ। | मेरी द्वारकाधीश और सोमनाथ यात्रा – भाग २ - [मेरी द्वारकाधीश और सोमनाथ यात्रा – भाग ३](https://test.lifescience-forum.com/dwarkadhish-and-somnath-yatra-part-3/) - सती माता अनुसुइया और अत्रि ऋषि के तीन पुत्र ब्रह्मा, विष्णु और महेश की कृपा से पैदा हुये थे। तीनों का नाता प्रभास क्ष्रेत्र से है। सबसे बड़े दुर्वासा, मझले सोम (चंद्र) और तीसरे दत्तात्रेय भगवान। दुर्वासा द्वारकाधीश के गुरु थे। सोम का संबंध सोमनाथ से है और तीसरे दत्तात्रेय भगवान गिरनार पर विराजित हैं। | मेरी द्वारकाधीश और सोमनाथ यात्रा – भाग ३ - [मानव और सत्ता का बाजार](https://test.lifescience-forum.com/human-and-politics/) - अमेरिका और यूरोप विश्व के खाद्य व्यापार पर कब्जा करना चाहते हैं। नया वर्ग वीगन फूड लाया गया है। ऐसा शाकाहार जिसमें मिल्क प्रोडक्ट भी नहीं रहेगा। अरे भैया जानवरों को काट खाने वालों में इतनी दया कहा से आ गयी? व्यापार समझिये। | मानव और सत्ता का बाजार ## Pages - 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